इस वर्ष का बग्वाल अभी अभी संपन्न हुआ. मौके पर मौजूद हमारे सहयोगी जयमित्र सिंह बिष्ट ने बताया कि बग्वाल अपरान्ह करीब दो बजकर चालीस मिनट पर शुरू होकर दो बज कर पचास मिनट पर समाप्त हुआ.
देखिये ताज़ा तस्वीरें.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…
पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…
View Comments
Very nice pictures...
सचमुच जीवंत तस्वीरें मानो हम स्वयं खोलिखाड़ -दूबाचौड़ (मैदान ) में मां बाराही के धाम पहुंच कर ऐतिहासिक पाषाण युद्ध देख रहे हो
अत्यंत मनोहारी दृश्य की जीवंत तस्वीरें मानो हम सचमुच मां बाराही के धाम में पहुंचकर बग्वाल मेला देख रहे हो
गौरीशंकर कांडपाल,
(संस्कृतिकर्मी)
CCRT
सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र,