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न्यूजीलैंड की उच्चायुक्त बनीं उत्तराखंड की कुमकुम पंत

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में जिला मुख्यालय से 20 किमी की दूरी पर एक गांव है भटी गांव. इसी गांव में बारहवीं में पढ़ने वाली एक लड़की है कुमकुम पंत. (Kumkum Pant Uttarakhand Pauri Garhwal)

कुमकुम पंत को पिछले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त बनाया गया. बतौर उच्चायुक्त कुमकुम ने दूतावास के अधिकारियों के साथ बैठक में दुनिया में लैंगिंक समानता को लेकर विचार विमर्श किया. (Kumkum Pant Uttarakhand Pauri Garhwal)

11 अक्टूबर के दिन वैश्विक तौर पर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. इस वर्ष 11 अक्टूबर को नौ बजे कुमकुम नई दिल्ली स्थित न्यूजीलैंड के उच्चायोग पहुंची थी. वहां सुबह सवा नौ बजे कुमकुम ने कार्यभार ग्रहण किया. कुमकुम को एक दिन के लिये यह पद दिया गया था.

सबसे पहले वहां कुमकुम ने उच्चायोग के अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त करने के बाद बैठक की. इस मीटिंग के बाद कुमकुम ने उच्चायोग की ओर से चलाए जा रहे स्कूल का भ्रमण किया. दोपहर के बाद दिन में तीन बजे कुमकुम पंत ने कार्यभार विधिवत लौटा दिया.

भुवनेश्वरी महिला आश्रम नामक एनजीओ से जुड़ी कुमकुम उन 34 लड़कियों में से एक थी जिन्हें 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर एक दिन के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं थीं.  

12वीं में पढ़ने वाली कुमकुम जीव विज्ञानं की प्रोफेसर बनना चाहती हैं. कुमकुम के पिता विपिन पंत शिक्षक हैं और उनकी माता पूनम पंत गृहणी हैं.

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार लौटने के बाद आत्मविश्वास से भरी कुमकुम ने कहा कि

बतौर उच्चायुक्त मेरा फोकस लैंगिंक समानता पर रहा. महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं. मैं गौरवान्वित हूं कि यह अवसर मिला.    

उत्तराखंड के विषय में कुमकुम का कहना है कि यहाँ की विषम भौगोलिक स्थिति के कारण संचार की स्थिति अच्छी नहीं है इसलिये सरकार को चाहिये की बालिकाओं को लेकर चल रही योजनाओं का प्रचार केवल रेडियो, टीवी के माध्यम से न किया जाय बल्कि नुक्कड़ नाटक जैसे पारम्परिक तरीकों को भी अपनायें.

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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