Featured

उत्तराखण्ड के कारगिल शहीद विवेक को गर्व से विदा किया परिवार ने

2 जनवरी 1970 को उत्तराखण्ड के देहरादून में जन्मे विवेक गुप्ता को सेना से प्यार विरासत में मिला था. उन्हें अपने पिता कर्नल बीआरएस गुप्ता की सुनाई सेना और सैन्य पराक्रम की कहानियां हमेशा ही रोमांचित करती थीं. उन्होंने भी अपने पिता की तरह सेना में जाने और देश की सेवा करने का संकल्प लिया. समूचे परिवार को उनके इस फैसले पर गर्व था. कॉलेज की पढाई पूरी कर विवेक भारतीय सैन्य अकादमी में भर्ती हो गए. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 13 जून 1992 को उन्हें एक आर्मी अफसर के रूप में 2 राजपूताना रायफल्स में कमिशन मिला.

खुशहाल सैन्य अफसर विवेक ने 1997 में राजश्री बिष्ट से शादी की, राजश्री भी सेना में अफसर थीं. विवेक एक समर्पित और बहादुर सैन्य अफसर थे. उन्हें एक पाकिस्तानी आतंकवादी को आमने-सामने की लड़ाई में मार गिराने के लिए ‘चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ’ से सराहा गया था.

मेजर विवेक ने कारगिल युद्ध के समय तोलोलिंग की पहाड़ी पर भारत का कब्ज़ा करने में निर्णायक भूमिका अदा की थी. इनकी बटालियन कारगिल वार के उस चरण में शामिल हुई थी जब इन्हें दुश्मन के संख्याबल और उनकी स्थिति की सटीक जानकारी नहीं थी. राजपूताना रायफल्स की इस बटालियन में शामिल विवेक गुप्ता और उनके साथी सैनिकों को पॉइंट 4590 पर अपना नियंत्रण कायम करने का आदेश दिया गया था. यह किया जाना एक जोखिम भरी बर्फीली पहाड़ी के बीहड़ रास्ते से गुजरकर ही संभव था. विवेक गुप्ता भारत की उस लाइट मशीनगन कमांडो टीम का हिस्सा थे जिसे तोलोलिंग की पहाड़ियों से सटे पाकिस्तानी बंकरों पर कब्जे को अंजाम देना था.

यह कारगिल युद्ध के सबसे मुश्किल अभियानों में से एक था. इसमें जोखिम भरे पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई चढ़ते हुए उस बंकर तक पहुंचना था जहाँ दुश्मन रणनीतिक रूप से बहुत मजबूत स्थिति में था. वह ऊँची चोटी पर बैठकर नीचे से आपको आता देख सकता था और आप पर हर वक़्त हमला कर सकता था. हिमालय की उन बर्फीली ढलानों की बीहड़ पगडंडियों पर शौर्य और पराक्रम के साथ लड़ते हुए दुश्मनों की 2 चौकियों पर कब्ज़ा करने के बाद 13 जून 1999 को विवेक शहीद हो गए.

लड़ाई के मैदान में चौतरफा अंधाधुंध गोलियों की बरसात में विवेक को कई गोलियां लगीं. गोलियां लगने के बाद भी विवेक तब तक नहीं मरे जब तक कि उन्होंने और उनके साथियों ने 7 पाकिस्तानी सैनिकों को मार नहीं दिया.  विवेक की शहादत के ज़ज्बे को देखकर समूची सैन्य टुकड़ी दुश्मनों तर टूट पड़ी और अंततः तोलोलिंग पर कब्ज़ा कर दुश्मन को खदेड़कर विजय हासिल की जा सकी.  दुश्मन की भारी गोलाबारी के कारण उनके मृत शरीर को 15 जून को ही भारतीय सेना तोलोलिंग की चोटी से ला पाने में कामयाब हो सकी.

उनकी सैनिक पत्नी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उनकी पत्नी राजश्री बिष्ट द्वारा उन्हें सैन्य वर्दी में दिए गए आखिरी सैल्यूट की तस्वीरों ने करोड़ों भारतीयों की आँखों में गौरवपूर्ण नमी ला दी थी.

13 जून 1992 को विवेक सेना में भर्ती हुए और इसके ठीक 7 साल बाद 13 जून 1999 को उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया.  

           

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

Mafia Casino Kod Promocyjny dla polskich graczy – Bonusy i promocje dla nowych użytkowników

Mafia Casino Kod Promocyjny dla polskich graczy - Bonusy i promocje dla nowych użytkowników ▶️…

2 hours ago

धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम

दुनिया के अनेक लोक कथाओं में ऐसा जिक्र तो आता है कि धरती जीवित है,…

5 months ago

कथा दो नंदों की

उपकोशा की चतुराई, धैर्य और विवेक से भरी कथा के बाद अब कथा एक नए…

5 months ago

इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी

पहाड़ों में मौसम का बदलना जीवन की गति को भी बदल देता है. सर्दियों की…

5 months ago

अल्मोड़े की लखौरी मिर्च

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खेती और लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है. पहाड़…

5 months ago

एक गुरु की मूर्खता

केरल की मिट्टी में कुछ तो है, या शायद वहाँ की हवा में, जो मलयालियों…

5 months ago