फोटो : सुधीर कुमार
देहरादून से कालसी की ओर जाते हुये कालसी से कुछ दूर पहले यमुना नदी से एक छोटी से नदी मिलती है अमलावा. अमलावा और यमुना नदी के संगम पर स्थित है मौर्य राजा अशोक के चौदह शिलालेखों में 13वां शिलालेख.
कालसी यमुना और टोंस नदी के संगम पर स्थित एक छोटा सा क़स्बा है जो देहरादून से करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित है. इसका प्राचीन नाम खलतिका था इसके अन्य नाम कालकूट व युगशैल भी मिलता है.
महाभारत काल में कालसी का शासक राजा विराट था और उसकी राजधानी विराटनगर थी. अज्ञातवास के समय पांडव रूप बदलकर राजा विराट के यहाँ ही रहे थे. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने सातवीं सदी में इस क्षेत्र को ‘सुधनगर’ नाम से पहचाना.
माना जाता है कि कालसी के स्तूपों का विनाश 1254ई. में संभवतः “नसीरुद्दीन महमूद” द्वारा किया गया. ब्रिटिश व्यक्ति फारेस्ट ने इसकी खोज 1860 ई० में की थी.
कालसी अभिलेख एक बड़ी चट्टान पर बना है. इस शिलालेख में हाथी की आकृति बनी है जिसके नीचे गजेतम शब्द लिखा है. हाथी को आसमान से उतरते हुये दिखाया गया है. इस संरचना की ऊंचाई 10 फुट और चैड़ाई 8 फुट है
प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में लिखे गये इस शिलालेख में कालसी क्षेत्र को “अपरांत” व कालसी निवासियों को “पुलिंद” शब्द से संम्बोधित किया गया है. शिलालेख अशोक के आंतरिक प्रशासन से संबंधित है.
शिलालेख में सम्राट के पशुओं को अनावश्यक मारने पर प्रतिबंध, जानवरों और इंसानों के लिए स्वास्थ्य सुविधा, युद्व घोष के स्थान पर धम्म घोष द्वारा विजय का उल्लेख किया गया है.
कालसी शिलालेख की कुछ तस्वीरें देखिये :
वाट्सएप पर हमारी पोस्ट प्राप्त करें:Watsapp kafal tree
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online
फायदेमंद है जोंक से अपना खून चुसवाना
भांग की चटनी – चटोरे पहाड़ियों की सबसे बड़ी कमजोरी
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…
भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…
उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…
‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…
कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…
बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…