समुद्र तल से 1,870 मी की ऊंचाई पर स्थित जागेश्वर मंदिर समूह का जिक्र स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में भी है. अल्मोड़ा शहर से 37 किमी की दूरी पर स्थित जागेश्वर मंदिर समूह में कत्यूरीकाल, उत्तर कत्यूरीकाल एवं चंद्र काल के कुल 124 मंदिर हैं. माना जाता है कि जागेश्वर मंदिर समूह का निर्माण काल 9वीं से 13वीं सदी के मध्य का है.
(Jageshwar Mandir Almora Photos)
जागेश्वर मंदिर समूह का निर्माण पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं से किया गया है. मंदिर के दरवाजों की चौखटों में देवी देवताओं की प्रतिमायें लगी हुई हैं. इसके निर्माण में तांबे की चादरों और देवदार की लकड़ी का भी प्रयोग किया गया है.
जागेश्वर मंदिर समूह के अधिकांश उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित हैं. जागेश्वर मंदिर समूह के बड़े मंदिरों में शिखर के ऊपर लकड़ी की छत भी लगाई जाती है. यह इस शिल्प की विशेषता है जिसे स्थानीय भाषा में इसे बिजौरा कहा जाता है.
जागेश्वर को हटकेश्वर और नागेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. सावन के महीने में यहाँ पूरे माह मेला लगता. सावन के महीने में लोग दूर-दराज़ से आकर यहां पार्थिव पूजा करवाते हैं.
(Jageshwar Mandir Almora Photos)
जयमित्र सिंह बिष्ट
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.
इसे भी पढ़ें: सोमेश्वर से धान की रोपाई की जीवंत तस्वीरें
काफल ट्री का फेसबुक पेज : Kafal Tree Online
Support Kafal Tree
.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…
2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…
नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…
पिछली कड़ी : उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी…