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आजाद भारत के पहले आम चुनाव की ख़ास बातें

1-वर्ष 1950 में भारत आजाद गणतंत्र बना. जवाहर लाल नेहरू गणतांत्रिक भारत के पहले प्रधानमन्त्री अवश्य बने लेकिन अभी उन्हें जनता ने नहीं चुना था.

2-भारत के गणतंत्र को लोकतंत्र बनाने के लिए देश आम चुनाव की तैयारी में जुट गया.

3-गणतंत्र की घोषणा से ठीक पहले दिन चुनाव आयोग का गठन किया गया.

4-सुकुमार सेन को पहला मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया. सेन आईएएस अफसर होने के साथ-साथ गणितज्ञ भी थे.

5- इस समय भारत की आबादी 36 करोड़ थी और इसमें से मताधिकार के योग्य बालिगों की संख्या थी 17 करोड़ 20 लाख. इसमें से 10 करोड़ 59 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

6-इस चुनाव में कुल 4500 सीटों का फैसला होना था जिनमें 489 लोकसभा सीटें थीं और 3280 विधान सभा सीटें.

8-चुनाव संपन्न करने के लिए 22400 पोलिंग बूथ बनाये गए.

9-इस समय देश की सिर्फ 20 फीसदी आबादी ही शिक्षित थी सो पार्टी नाम की जगह चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल किया गया. बूथ पर हर पार्टी के चुनाव चिन्ह वाले बैलेट बॉक्स अलग-अलग रखे गए.

10-जनगणना के वक्त अपने नाम की जगह फलां की माँ या या पत्नी लिखा चुकी 28 लाख महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए.

11-चुनाव की प्रक्रिया समझाने के लिए रेडियो और फिल्मों की मदद ली गयी.

12-भारत के आम चुनाव का पहला वोट 25 अक्टूबर 1951 हिमाचल की छिनी तहसील में डाला गया.

13-यह आम चुनाव फ़रवरी 1952 में संपन्न हुए.

14-भारत के पहले आम चुनावों में जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया कांग्रेस पार्टी भारी बहुमत से विजय हुई. कांग्रेस को लोकसभा की 498 सीटों में से 324 और राज्य विधानसभा सीटों की कुल 3280 में से 2247 में जीत हासिल हुई.

15-कांग्रेस को कुल मतों का 44.99 प्रतिशत हासिल हुआ.

16- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी 16 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही. जयप्रकाश और लोहिया की सोशलिस्ट पार्टी को 12 सीटें मिलीं. आचार्य कृपलानी की किसान मजदूर पार्टी को 9, हिन्दू महासभा को 4, भारतीय जनसंघ को 3, आंबेडकर की शिड्यूल कास्ट फैडरेशन को 2 सीटें मिलीं.

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Sudhir Kumar

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