यह कहानी है बहुत पुराने जमाने की, जब जंगल घने हुआ करते थे और उनमें भालू, भेड़िये, शेर, चीते, सियार और जंगली सूअरों का बसेरा था. ये जानवर जंगली जरूर थे, पर सिर्फ जीवन-यापन के लिए शिकार करते थे, मनोरंजन के लिए नहीं. इसलिए, वे आपस में और धरती के पहले रहवासी, आदिवासियों के साथ मिल-जुल कर रहते थे. यह सचमुच सद्भाव का स्वर्ण युग था, जब आदमी और प्रकृति के बीच गहरा रिश्ता था. चारों तरफ झरने बहते थे, जो ठंडा और स्वच्छ पानी देते थे. जानवर और आदिवासी दोनों ही एक साथ शांति से पानी पीते और नहाते. यह धरती दूध और शहद की नदियाँ बहाती थी.
(Folk Story of Kawaii and Kawaii)
आदिवासियों को मेहनत की जरूरत नहीं पड़ती थी. जरा-सा खोदने पर ही धरती फल दे देती थी. वे बिना पकाए ही, सिर्फ मन में इच्छा करते कि क्या खाना है, कच्चा या भुना, और वह भोजन केले के पत्तों में लिपटा हुआ उनकी गोद में आ गिरता. वे सारा दिन गिल्ली-डंडा और लुका-छिपी खेलते, धूप और छाँव का आनंद लेते, अच्छा खाते और गहरी नींद सोते. रातें गर्म और हवाएँ ठंडी होती, इसलिए स्वाभाविक रूप से पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के प्रति अपने आकर्षण के अनुसार प्रेम करते. और इसीलिए हर दस महीने में एक नन्हा बच्चा परिवार की खुशियाँ बढ़ाता.
आसपास के पीपल के पेड़ों में ‘भूत’ नामक रक्षक आत्माएँ निवास करती थीं, जो आदिवासी गाँवों की रखवाली करती थीं. पूर्णिमा की रातों में सभी भूत सबसे बड़े पीपल के पेड़ में इकट्ठा होते और जिन आदिवासियों की वे रक्षा करते, उनके बारे में बातें करते.
एक बार जब बारिश का मौसम आया, तो भूत, लूसाड़िया के पास एक पहाड़ी पर जमा हुए. उन्होंने अपनी चिंता जताई कि आदिवासियों की बढ़ती आबादी के कारण जल्द ही रक्षक भूतों से ज्यादा आदिवासी हो जाएँगे और जंगल में भोजन भी कम पड़ने लगेगा. भूतों ने पहले तो लोगों को कम बच्चे पैदा करने की चेतावनी देने का सोचा, पर वे जानते थे कि मस्तमौला आदिवासी उनकी नहीं सुनेंगे. उन्होंने महामारी फैलाने का भी विचार किया, पर वे उनके रक्षक थे, ऐसा वे नहीं कर सकते थे.
इसी बीच, मूसलाधार बारिश शुरू हो गई. नदियाँ उफन आईं और आदिवासी इलाका पानी-पानी हो गया. बाढ़ का पानी इतनी तेजी से चढ़ा कि कई आदिवासी डूब कर मर गए. आपस का भाईचारा टूटने लगा, हर व्यक्ति सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था.
पांचाल गाँव के एक युवक, कवा ने, अपने परिवार और दोस्तों को बाढ़ में खोते देखा. हताश होकर वो एक बरगद के चौड़ी तने पर चढ़ गया, जो पानी में नाव की तरह तैर रहा था. वहीं सवार होकर उसने अपनी जान बचाई. जब उसने चारों ओर देखा तो खुद को बिल्कुल अकेला पाया.
(Folk Story of Kawaii and Kawaii)
आज जहाँ गुजरात और राजस्थान की सीमा है, वहां एक युवती, कवी ने भी कुछ ऐसा ही किया. वह एक महुए के बहते तने को पकड़कर बच गई. बाढ़ का पानी अभी भी चढ़ रहा था. कवी को उस तने पर बैठे हुए लहरें उस चट्टान तक ले आईं, जहाँ आज शामलाजी का मंदिर है. एक तेज लहर ने उसे उस चट्टान पर पटक दिया, जहाँ आज ‘भाईबहेन नी डेरी’ नामक एक छोटा स्मारक है. थकान से चूर, वह गीली चट्टान पर गहरी नींद में सो गई.
जब उसकी आँख खुली, तो अंधेरा कुछ कम था और जमीन सूखने लगी थी. तभी उसने देखा कि लहरें कुछ अंधेरा सा लिए चली आ रही हैं, मानो कोई नाव हो. वह चीज भी उसी की चट्टान से टकराई. डर से कवी चीख पड़ी जब उसने देखा कि वहाँ एक इंसान का शरीर पड़ा है. उत्सुकतावश जब वह पास गई, तो पहचाना कि वह एक युवक का शरीर है!
जैसे ही वह उसे देख रही थी, युवक ने भी आँखें खोल दीं. “मैं कहाँ हूँ?” उसने कहा.
कवी ने कोई जवाब नहीं दिया.
“तुम कौन हो? मैं कहाँ हूँ?” युवक ने फिर पुकारा.
“हम इस चट्टान पर हैं, बाढ़ से बचे हुए. मुझे लगता है, हम दो ही बचे हैं,” कवी ने कहा. वह ठंड, गीलेपन और भूख से व्याकुल थी. तभी अचानक एक लहर ने एक मछली उसकी गोद में फेंक दी. उसे देखकर वह खुशी से चिल्ला उठी. उसने मछली को तुरंत काटा और एक टुकड़ा लड़के को दे दिया.
(Folk Story of Kawaii and Kawaii)
“मैं कवी हूँ,” उसने शर्म से कहा.
“और मैं कवा,” लड़के ने जवाब दिया.
यह भोजन उनकी पहली मुलाकात थी. जैसे-जैसे उन्होंने भोजन किया, वे एक-दूसरे को शर्माते हुए देखने लगे, और जो उन्होंने देखा, वह उन्हें अच्छा लगा. वे उस चट्टान पर पूरी तरह अकेले थे, फिर भी उन्हें लग रहा था कि कोई दैवीय शक्ति वहाँ मौजूद है.
रात होने पर, ठंडी हवा चलने लगी. कवी, कवा के पास चली गई. और जैसे ही उसने उसे पकड़ा, उसने महसूस किया कि वह उसे चाहने लगा है. और फिर एक-दूसरे में लिपटे हुए उन्होंने रात बिता दी.
और उसी रात उन्होंने देखा कि कुदरत वास्तव में वहाँ रहती है. आधी रात को अचानक सन्नाटा छा गया, और उन्होंने सफेद वस्त्रों में दो आकृतियाँ देखीं. पहली बोली: “मैं कुदरत का वह पहलू हूँ, जिसे तुम और तुम्हारे पूर्वज जानते थे. मैं वह अंधेरा पक्ष हूँ जिसे ‘देवा’ कहते हैं. यह देवालय है. मैंने ही यह महाप्रलय लाई. मैं यह देख नहीं पा रहा था कि तुम्हारे पूर्वज स्वतंत्रता का ये मतलब समझते थे कि जो मन करे वही करो. इसीलिए प्रलय ने उन सबको नष्ट कर दिया. तुम दोनों कुदरत की प्रार्थना के कारण जीवित बच गए हो.”
इस पर दूसरी सफेद आकृति आगे आई. देवा ने उसकी ओर देखा और कहना जारी रखा: “तुम दोनों कुदरत के दोनों पहलुओं के, हमारे, विशेष प्रिय हो. और इस बात के प्रमाण के रूप में कि हम फिर कभी तुम्हें नष्ट नहीं करेंगे, हम तुम्हें एक नया नाम देते हैं. तुम कवी, अब ‘स्त्री’ कहलाओगी और तुम कवा, अब ‘पुरुष’ कहलाओगे.”
यह सुनकर कवा और कवी दोनों बहुत हैरान हुए, पर रहस्यमय ढंग से उन्हें अब बहुत सुरक्षित महसूस हुआ, क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी रक्षा के लिए ईश्वर स्वयं मौजूद है.
(Folk Story of Kawaii and Kawaii)
–काफल ट्री फाउंडेशन
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
Visit Casino Middelkerke: praktische begeleiding voor een geslaagde ervaring Waarom een bezoek aan Casino Middelkerke…
Praktische gids voor het trusted Grand Casino Chaudfontaine Welkom op de ultieme handleiding voor iedereen…
Magyar Online Casino a legjobb ügyfélszolgálattal és támogatással ▶️ JÁTSZANI Содержимое Magyar Online Casino a…
Казино Sultan Games в Казахстане - Удобный вход и безопасная игра ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Удобство…
Казино онлайн 2026 - самые перспективные площадки для любителей азартных игр ▶️ ИГРАТЬ Содержимое Лучшие…
NV Casino Online - Boni und Sonderaktionen ▶️ SPIELEN Содержимое Willkommenspaket: 100% bis 500 EuroSonderaktionen:…