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अथ टार्च, लालटेन, लम्फू और ग्यस कथा

तब टार्च, लालटेन व लैम्फू के बिना अधूरा था जीवन -जगमोहन रौतेला आजकल तो भाबर में अब शहर तो छोड़िए…

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काल से होड़ लेता था कवि विष्णु खरे

पहल के ताज़ा अंक में अपनी डायरी की शुरुआत में विष्णु खरे की कविता, ‘एक कम’ की आख़िरी चार लाइनों…

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अभावों से अर्जुन अवार्ड तक का सफ़र

उत्तराखंड के औद्योगिक शहर रुद्रपुर के निवासी पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार का नाम साल 2018 के अर्जुन अवार्ड प्राप्त करने…

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बार-बार अपनी जड़ों की ओर क्यों उगते हैं बंबई के डेढ़ यार

अल्मोड़ा से बम्बई चले डेढ़ यार – तीसरी क़िस्त कठोपनिषद की तीसरी वल्ली (अध्याय) का पहला मंत्र है: ऊर्ध्व्मूलोSवक्शाख एशोSश्वत्थः…

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गुप्त वंश तथा कुमाऊं भाग-3

तोरमाणः- सन् पांच सौ ई. के लगभग हूण सरदार तोरमाण ने मालवा तक अपना शासन स्थापित किया और महाराजाधिराज की…

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सरयू आज भी सिसकती है – कुसुमा की त्रासद लोककथा

सुसाट मन को कपोरता है. लग जाता है एक उदेख जिसके अंदर कुहरा जाती है बाली कुसुमा की ओसिल कहानी.…

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मेरी नानी हिमालय पर मूंग दल रही है

रमाशंकर यादव 'विद्रोही' (3 दिसम्बर 1957 - 8 दिसंबर 2015) हिंदी के लोकप्रिय जनकवि हैं. वे स्नातकोत्तर छात्र के रूप…

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बाली उमर का सिनेमा प्रेम और सच बोलने का कीड़ा

लड़के, पढ़ने के लिए देहात से शहर जाते थे. आसपास के इलाकों में अव्वल तो कोई इंटर कॉलेज नहीं था.…

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शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 15

पहला दखल वो एक नम सुबह थी. ये बताना मुश्किल है कि कल रात की ओस ने देवदार की गहरी…

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स्मृति शेष : मेरी यादों में शमशेर

काफल ट्री के नियमित लेखक, उत्तराखण्ड पुलिस में कार्यरत प्रमोद साह ने अपने छात्र जीवन तथा उसके बाद की डॉ.…

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