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घर वाली दीपावली और निबंध वाली दीपावली

हमारी शिक्षा की गोभी सबसे पहले हमारी स्कूली शिक्षा से खुदती है. स्कूल में पढाई 80 प्रतिशत व्याहारिक बातें गलत…

8 years ago

पीहू की कहानियाँ – 2

जब लगा कि अब पीहू नहीं बन सकती ... कहानी और पीहू दोनों मिल चुकी थी. प्रोड्यूसर मिलना बाक़ी था.…

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लौंडे-लबारों की बरात में सयाने बूढ़े की होशियारी

छी भै ये बूढ़े लोग भी न, बहुत तंग कर देते हैं. जब कुछ काम नहीं कर सकते तो आराम…

8 years ago

प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता

  चन्द्रकान्त देवताले 7 नवंबर 1936 को जौलखेड़ा, बैतूल (मध्य प्रदेश) में जन्मे चन्द्रकांत देवताले समकालीन हिन्दी कविता के सबसे…

8 years ago

विषय से ज्यादा कठिन शिक्षक

गणित से लड़के दूर- दूर भागते थे. इस पर अफसोस इस बात का था कि, भविष्य के बेहतर मौके, केवल…

8 years ago

इतने विशाल हिंदी समाज में सिर्फ डेढ़ यार : नौवीं क़िस्त

अनुवाद पढ़कर बनता है गंभीर और स्थायी पाठक भारत जैसे महादेश में जितनी भाषाएं बोली जाती हैं, उन्हें देखते हुए…

8 years ago

नैनीताल के तीन नौजवानों की फाकामस्त विश्वयात्रा – 4

डमास्कस में किस्मत के सितारे आज कुछ बुलंद लग रहे थे. लिफ्ट के लिए हमें इंतजार नहीं करना पड़ा. 25'०००…

8 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 14

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

8 years ago

हमें अदाएँ दीवाली की ज़ोर भाती हैं

आज से कोई तीन सौ बरस पहले आगरे में एक बड़े शायर हुए नज़ीर अकबराबादी. नज़ीर अकबराबादी साहब (1740-1830) उर्दू…

8 years ago

अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 5

गुडी गुडी डेज़ अमित श्रीवास्तव हीरामन उवाच ‘गुडी गुडी मुहल्ले की निवर्तमान सामाजिकी चार आप्त वाक्यों से मिलकर बनी थी,'…

8 years ago