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मेंढक कहानी के लेखक गम्भीर सिंह पालनी के साथ मुलाकात

वरिष्ठ कथाकार व कवि गम्भीर सिंह पालनी पिछले 12 नवम्बर 2018 को हल्द्वानी में डॉ. प्रशान्त निगम के पास अपने…

7 years ago

बदलते परिवेश का पहाड़ – पहली क़िस्त

मुझे और मेरे सहपाठी रतन सिंह को जिस दिन चकराता से त्यूनी जाना था उसके एक रात पहले चकराता और…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 32

  पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम…

7 years ago

हल्द्वानी के पिक्चर हॉल में लगी विनोद कापड़ी की पीहू

मूलतः कुमाऊँ के बेरीनाग इलाके के निवासी और हमारे साथी फिल्मकार-पत्रकार विनोद कापड़ी लगातार काफल ट्री पर अपनी उपस्थिति दर्ज…

7 years ago

बयासी के हुए आज ज्ञानरंजन

आज हिन्दी की सबसे महत्वपूर्ण पत्रिका 'पहल' के यशस्वी सम्पादक और महान कथाकार ज्ञान जी का जन्मदिन है. आज ज्ञान…

7 years ago

कैसे बनता है बरेली का मांझा : एक फोटो निबंध

‘कनकौए और पतंग’ शीर्षक अपनी एक रचना में नज़ीर अक़बराबादी साहेब ने पतंगबाज़ी को लेकर लिखा था: गर पेच पड़…

7 years ago

फ़लक ज़मा को मिला दूसरा प्रोफ़ेसर आई. डी. सक्सेना मेमोरियल अवार्ड

विज्ञान, मेडिकल अध्ययन और फिजियोलॉजी के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रोफ़ेसर आई. डी. सक्सेना मेमोरियल अवार्ड इस वर्ष राजकीय…

7 years ago

हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 38

यहां भाबर के लिए एक शब्द अक्सर प्रयोग में लाया जाता है ‘भबरी जाना,’ यानि खो जाना. यह बात पहले…

7 years ago

छानी ल्वेशाल के अनिल सिंह दोसाद और उनका वैली व्यू रेस्तरां

कुमाऊं के सुन्दर कौसानी-सोमेश्वर मार्ग पर कौसानी से 3 और सोमेश्वर से 9 किलोमीटर दूर एक छोटी सी जगह पड़ती…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 31

  पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम…

7 years ago