रक्षा अनुसंधान संस्थान देहरादून में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत डी पी त्रिपाठी का शौक अलग है, सपने भी और…
भोलानाथ कुमाऊं के सर्वाधिक पूज्य और लोकप्रिय देवताओं में से एक है. यह अनेक कुलों का इष्ट देवता है. इसकी…
पिताजी का तबादला अगस्त, 1972 में जोशीमठ से काशीपुर हुआ था. पहाड़ से उतरकर पहली बार प्लेन्स देखा. हर चीज…
एक पहाड़ी ऐसा भी जहाँ एक तरफ पहाड़ का युवा शहरों की तेज़ तर्रार भागती ज़िन्दगी का दीवाना है वहीं…
किसी शहर के भविष्य का आधार उसका युवा होता है. एक ऐसे समय जब पूरे विश्व भर में युवाओं को…
सफलता की कहानी यूं ही नहीं लिखी जाती. ईमानदारी से किए गए संघर्ष और कड़ी मेहनत ही सफलता की कहानी…
आजकल पहाड़ों में ही नहीं देश-विदेश में “फ्वां बाघा रे” गीत की बहुत चर्चा है. यह गीत इतिहास की एक…
मृत्यु के बाद आदमी कहां जाता है? इस प्रश्न ने मानव सभ्यता को हजारों सालों से असमंजस में डाला है.…
जब से हमने होश संभाला, कुमांऊनी का गाना – ‘चैकोटकि पारबती तीलै धारू बोला बली, तीलै धारू बोला’ अथवा ‘ओ…
ऐपण हमारी परवरिश का एक हिस्सा रहा है जो बाद में केवल महिलाओं और लड़कियों तक सीमित रह गया. ऐपण…