कॉलम

एक पासपोर्ट साइज़

स्मृति के कोई दर्ज़न भर स्थिर-चित्रों से बना था उसका शहर. उसका शहर पतली सड़कों और बक्सेनुमा मकानों का संकुल…

7 years ago

सूरज की मिस्ड काल – 7

दुनिया की सब माँ ये एक सरीखी होती हैं आज इतवार के चलते अपन अलसाए से लेते रहे. कई बार…

7 years ago

बेरीनाग टू बंबई वाया बरेली भाग- 3

पिछली कड़ी से आगे… हैवलोक लाइन्स , मिलेट्री अस्पताल और सिकंदराबाद... कभी सोचिए, जो ज़िंदगी आपने जी तो हो और आपको…

7 years ago

पहाड़ और मेरा बचपन – 2

(पिछली क़िस्त का लिंक: पहाड़ और मेरा बचपन - सुंदर चंद ठाकुर का नया कॉलम) मेरी दूसरी स्मृति एक सांप…

7 years ago

रामी बलोद्याण की कथा

बरसाती झड़ी की एक सुबह से मैंने दादी से रट लगाई दूध का हलवा बना. वो बोली आज पिस्युं नी…

7 years ago

‘मिसाइल मैन’ वाली हेयर स्टाइल

कुछ रोज पहले की बात है. मैं, बाल कटवाने गया था. नापित के यहाँ बाल कटवाने में नंबर लगाना पड़ता…

7 years ago

साझा कलम: 9 पदमिनी अबरोल

[एक ज़रूरी पहल के तौर पर हम अपने पाठकों से काफल ट्री के लिए उनका गद्य लेखन भी आमंत्रित कर…

7 years ago

इतने विशाल हिंदी समाज में सिर्फ डेढ़ यार : पांचवीं क़िस्त

पंडित प्रतापनारायण मिश्र के ‘ब्राह्मण’ और डकैत फूलन देवी के ‘ठाकुर’ पिछली बार हमारा किस्सा इस बात के जिक्र पर…

7 years ago

अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! – अमित श्रीवास्तव का नया कॉलम

गुडी गुडी डेज़ -अमित श्रीवास्तव गुडी गुडी मुहल्ले के शोभा चाचा. नाम शोभनाथ या शोभाकांत जैसा कुछ रहा होगा. हमें…

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यह हम सबकी चुगली है

मोहिनी, यह तुम्हारी घात नहीं है -नवीन जोशी तुमसे विनती है कि तुम, जो इसे पढ़ोगे, यही सोचना कि मैं…

7 years ago