कॉलम

क़स्बे की एक सर्द रात – 1

"आप क्या लेना पसंद करेंगे सर?", कहीं दूर से आती वो खनकती सी आवाज़ उसे एक झटके में किसी गहरी…

8 years ago

कहो देबी, कथा कहो – 7

पिछली कड़ी अलविदा नैनीताल हां, नैनीताल ही याद आता रहा और मैं जैसे कहीं दूर खड़ा होकर मन ही मन…

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शेर और आग जलाने की लकड़ी

अफ्रीकी लोक कथाएँ – 9 यह उस ज़माने की बात है जब जानवर और मनुष्य इकठ्ठे रहा करते थे. उन…

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कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 9

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

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भटकने का अपना सुख है

माचिस की डिबिया -संजय व्यास तीली माचिस की हरेक तीली की नोक पर पिछले दस हज़ार सालों का इतिहास दर्ज़…

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प्रेम से ज्यादा कमिटमेंट मांगती है जिंदगी

कृष्ण को राधा से प्यार था, लेकिन जब वे गोकुल छोड़कर गए तो फिर लौटकर नहीं आए. बाद में उन्होंने…

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सिनेमा: लोक में छिपी सुरीली धुनों को तलाशती ‘जुगनी’

युवा फ़िल्मकार शेफाली भूषण पिछले दो दशकों से अपनी वेबसाइट ‘द बीट ऑफ़ इंडिया’ के जरिये दूर-दराज के लोक गायकों…

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पहाड़ और मेरा बचपन – 5

पिछली क़िस्त - पहाड़ और मेरा बचपन – 4 गांव में उन बहुत बचपन के दिनों के बाद मुझे दिल्ली…

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अक्लमंद सियार की कहानी

अफ्रीकी लोक कथाएँ – 8 “सुनो, सुनो, सुनो, मेरे बच्चो,” एक शाम गोगो ने बोलना शुरू किया. “जानते हो न,…

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कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 8

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

8 years ago