संस्कृति

फूलदेई: बाजार की मार से हांफता त्यौहार

बात ज्यादा पुरानी भी नहीं है. उत्तराखण्ड के पहाड़ की तलहटी पर कुछ बसावटें कस्बे के सांचे में ढल रही…

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फुलदेई की फुल्यारी बसंत के रंग

फुलदेई, फुल्यारी के रंग फुलदेई का त्यौहार (Phool Dei Festival) उत्तराखण्ड में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है. जितने रंग…

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बसंत के इस्तकबाल का त्यौहार है फूलदेई

ऋतुराज बसंत का स्वागत उत्तराखण्ड को देवभूमि के साथ उत्सवों की भी भूमि कहा जाय तो गलत नहीं होगा. यहाँ…

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एक हिमालयी लोक कथा: माता की वेदना

Read the post in English : Mother’s Grief माता की वेदना हिमालयी भूभाग के तिब्बत की एक प्रचलित लोक कथा…

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विश्व में सबसे ऊंचा शिव मंदिर है तुंगनाथ

समुद्र की सतह से 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ (Tungnath) मंदिर की गिनती पञ्चकेदार में होती है. उत्तराखंड…

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हुड़का: उत्तराखण्ड का प्रमुख ताल वाद्य

उत्तराखण्ड का प्रमुख ताल वाद्य ढोल, दमाऊ, डौर, ढोलक, नगाड़ा, धतिया नगाड़ा, थाली और हुड़का (Hudka) आदि उत्तराखण्ड के प्रमुख…

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जिनके पिया परदेस बसत हैं : लखनऊ में कुमाऊनी होली की परम्परा

'उत्तराखण्ड होली के लोक रंग' शेखर तिवारी द्वारा संपादित एक महत्वपूर्ण पुस्तक है. चंद्रशेखर तिवारी काफल ट्री के नियमित सहयोगकर्ता…

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रितुरैण या ऋतुरैण: चैत के महीने में गाये जाने वाले लोक गीत

रितुरैण या ऋतुरैण (Riturain) गीतों का उत्तराखण्ड की लोक परम्पराओं में महत्वपूर्ण स्थान रहा है. इन्हें बसंत ऋतु और विशेषकर…

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शकुनाखर: मांगलिक अवसरों पर गाये जाने वाले गीत

शकुनाखर (Shakunakhar) उत्तराखण्ड (Uttarakhand) के कुमाऊँ मंडल में किसी भी शुभ कार्य की शरुआत से पहले गाये जाने वाले गीत…

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रंग डारि दियौ हो अलबेलिन में – पहाड़ी होली पर गिर्दा का आलेख

काफल ट्री के नियमित सहयोगी चंद्रशेखर तिवारी ने 'उत्तराखण्ड होली के लोक रंग' नाम से एक महत्वपूर्ण पुस्तक का सम्पादन…

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