समाज

भगवान कृष्ण की माता देवकी के जन्म की कुमाऊनी लोककथा

हिमालयी लोकगाथाओं में कृष्ण को नागों का राजा अर्थात नागराज कहा जाता है. कृष्ण के जन्म और बचपन को लेकर अनेक गीत गाये जाते हैं. Birth of Devki Kumaoni Folk Myth

ऐसे ही एक गीत का सार नीचे दिया जा रहा है. नाग वंश की वंशावली इस प्रकार मानी गयी है: अमी नाग, फणी नाग, सीसर नाग, बीसर नाग, ततकी नाग, वासुकी नाग, कृष्ण के पिता. पुराणों में दी गयी वंशावली से भिन्न होने के बावजूद यह दिलचस्प है.

राजा औक की चार रानियाँ थीं – दिति, अदिति, कद्रू और बनिता. कद्रू से 2740 पुत्रियाँ पैदा हुईं. उसने अपनी 2700 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से कर दिया जिनसे चन्द्र वंश के राजाओं की उत्पत्ति हुई. उसने अपनी बची हुई पुत्रियों का विवाह सूर्य से किया जिसके कारण सूर्य वंश के राजाओं की उत्पत्ति हुई. कद्रू की नर संतानें गिद्ध थीं जबकि बनिता की नर संतानें सांप. दिति से देवता जन्मे जबकि अदिति से असुर. Birth of Devki Kumaoni Folk Myth

एक बार की बात है जब कंस असुरों का राजा था. उसने देवताओं और मनुष्यों पर बहुत अत्याचार कर रखा था. उसने अनेक तरह के अवैध कर (टैक्स) लगा रखे थे जैसे कि कुमारी कन्याओं और जंगल  में उगने वाली घास पर कर. उसने देवताओं को अपना आधिपत्य स्वीकारने पर विवश किया. इसके बाद देवता ब्रह्मा के पास सलाह मशविरे के लिए गए. उन्होंने अपनी जांघें चीर कर उनसे जिकले रक्त को मिट्टी के एक घड़े में रखा. ब्रह्मा ने कहा, “इस रक्त से एक प्राणी का जन्म होगा जो कंस और अन्य असुरों का नाश करेगा.

फिर उन्होंने उस घड़े को अच्छे से ढंका और नजराने के तौर पर कंस के पास भेज दिया. कंस घड़े को देख कर प्रसन्न हुआ और उसने उसे अपनी माँ के पास भिजवा दिया. उसकी माँ का नाम पवन रेखा था. पवन रेखा ने घड़े को खोला और उसके भीतर देखा. उसके नथुनों में घड़े में भरे रक्त की भाप भर गयी. इस भाप ने उसके गर्भाशय पर आक्रमण कर उसे गर्भवती बना दिया. जब उसे इस बात का पता चला उसने अपने सात बेटों को अपने पास बुला कर उन्हें इस बारे में बताया और आने वाले बुरे समय की बाबत चेतावनी भी दी. Birth of Devki Kumaoni Folk Myth

समय बीतने पर पवन रेखा ने एक बालिका को जन्म दिया जिसका नाम ज्योतिषियों ने देवकी रखा और यह भविष्यवाणी भी की कि उसका आठवाँ बच्चा कंस और अन्य असुरों का संहार करेगा.  

[यह कथा ई. शर्मन ओकले और तारादत्त गैरोला की 1935 में छपी किताब ‘हिमालयन फोकलोर’ से ली गयी है. मूल अंग्रेजी से इसका अनुवाद अशोक पाण्डे ने किया है. इस पुस्तक में इन लोक कथाओं को अलग अलग खण्डों में बांटा गया है. प्रारम्भिक खंड में ऐतिहासिक नायकों की कथाएँ हैं जबकि दूसरा खंड उपदेश-कथाओं का है. तीसरे और चौथे खण्डों में क्रमशः पशुओं व पक्षियों की कहानियां हैं जबकि अंतिम खण्डों में भूत-प्रेत कथाएँ हैं. A Girl and her Snake Husband]

‘हिमालयन फोकलोर’ से अन्य कहानियां पढ़ें – 
बहादुर पहाड़ी बेटा और दुष्ट राक्षसी की कथा
एक तीतर को लेकर हुए घमासान में एक परिवार के उजड़ने की लोककथा

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