उसे जान-पहचान में मेहमान बनने का बहुत शौक था. वह इतना भी जरूरी नहीं समझता था कि जान-पहचान बहुत गहरी…
हल्द्वानी के बरेली रोड में आज भी अब्दुल्ला बिल्डिंग विख्यात है. इसके बारे में माजिद साहब बताते हैं कि उनका…
निर्माण के दिन वर्ष भर बाद 1970 में ‘किसान भारती’ मासिक के संपादक रमेश दत्त शर्मा के विश्वविद्यालय छोड़ देने…
उत्तराखण्ड की निचली पहाड़ियों में कल दिन भर मौसम की पहली बर्फ़बारी हुई. गढ़वाल मनादल के केदारनाथ, बद्रीनाथ, चौपटा, गंगोत्री,…
पिछले एक साल से मुनस्यारी के तीन लड़के नवनीत, नवल और लवराज 'बूंद' गीत पर मेहनत कर रहे हैं. इस…
पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम…
धारचूला में हुए रं महोत्सव 2018 की कुछ तस्वीरें आपने कुछ दिन पहले देखी थीं. आज देखिये इस समारोह की…
वो अपनी ही कविता के एक लुटेपिटे हैरान से थकान से चूर खून और गर्द से भरे चेहरे वाले आदमी…
कुछ खिलाड़ी सचमुच अद्वितीय होते हैं, वे अपनी व्यक्तिगत शैली का इतना प्रभाव छोड़ते हैं कि खेल उनके आने के…
बहुत से लोग आज इस बात को यक़ीन से कहते हैं कि धर्मेन्द्र ने अपना करियर बनाने के लिए मीनाकुमारी…