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रात गहराने पर वह बास्केटबॉल लेकर सो जाता था

कुछ खिलाड़ी सचमुच अद्वितीय होते हैं, वे अपनी व्यक्तिगत शैली का इतना प्रभाव छोड़ते हैं कि खेल उनके आने के बाद पहले जैसा नहीं रह जाता. इधर के दशकों में हम क्रिकेट में सनत जयसूर्या का ज़िक्र कर सकते हैं या गोल्फ़ में टाइगर वुड्स का और टेनिस में मार्टिना नवरातिलोवा का. अमरीकी बास्केटबॉल खिलाड़ी मैजिक जॉन्सन को इस श्रेणी के खिलाड़ियों में सबसे ऊपर की पंक्ति में रखा जा सकता है.

जनरल मोटर्स की असेम्बली यूनिट में मजदूर अर्विन जॉन्सन सीनियर और स्कूल में आया का काम करने वाली क्रिस्टीन के दस बच्चों में छठे थे 14 अगस्त,1959 को जन्मे अर्विन जॉन्सन जूनियर. बचपन ही से बास्केटबॉल के प्रति दीवाने जूनियर दिन भर खेलते रहते थे. “मैं घर से किसी स्टोर भेजे जाने पर जाते वक्त दाएं और आते वक्त बाएं हाथ से ड्रिब्लिंग किया करता था. रात गहराने पर मैं बास्केटबॉल लेकर सो जाता.” अपनी जीवनकथा में उन्होंने लिखा है.

अर्विन जूनियर को लैन्सिंग के एवरेट हाईस्कूल से खेलते हुए 1974 में एक नामी खेल-पत्रकार ने “मैजिक” उपनाम दिया क्योंकि उस साल उन्होंने पॉइंट्स स्कोर खड़े करने के जादुई कारनामे किए थे. यह अलग बात है कि जूनियर अर्विन की धर्मभीरु मां अपने बेटे को “मैजिक” कहे जाने के इस लिए खिलाफ़ थीं कि जादू वगैरह गैरधार्मिक गतिविधियों में शुमार होते हैं. लेकिन तब से दुनिया इस खिलाड़ी को मैजिक जॉन्सन के नाम से ही जानती है. आखिरी हाईस्कूल सीज़न में मैजिक के नेतृत्व में एवरेट ने २७ जीतों और एक हार के रेकॉर्ड के साथ राज्य चैम्पियनशिप जीती.

1979 में मैजिक का पेशेवर खेल जीवन शुरू हुआ जब दुनिया में सबसे बड़ी इनामी राशि वाली एनबीए यानी नेशनल बास्केटबॉल लीग में खेलने के लिए लॉस एन्जेल्स लेकर्स जैसी नामी गिरामी टीम ने उन्हें अनुबंधित किया. अपने पहले ही सीज़न में मजिक जॉन्सन ने ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ का टाइटिल जीता और लेकर्स ने चैम्पियनशिप.

1980 का दशक अमरीकी बास्केटबॉल इतिहास में “मैजिक दशक” के नाम से विख्यात है. इस दौरान लॉस एन्जेल्स लेकर्स ने पांच बार चैम्पियनशिप जीती – जॉन्सन को तीन बार ‘मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ का ख़िताब मिला. इस खेल से जुड़े सारे इनामों-सम्मानों से नवाज़े जा चुके मैजिक जॉन्सन के हाथ में जैसे कोई चुम्बक लगा हुआ था. उनकी ड्रिब्लिंग, पासिंग और स्कोरिंग के नए तरीके अब प्रशिक्षकों की किताबों के हिस्से बन चुके हैं. खु़द जॉन्सन ने उन्हें अपनी मेहनत और लगन के बूते पर ईजाद किया था.

1991-92 के एनबीए सीज़न की शुरुआत प्रशंसकों के लिए सन्न कर देने वाली रही जब जॉन्सन ने एक टेस्ट में पॉजीटिव पाए जाने पर सार्वजनिक घोषणा की कि उन्हें एड्स है. साथ ही उन्होंने संन्यास भी ले लिया. इस के बावजूद प्रशंसकों द्वारा उन्हें 1992 के ऑल-स्टार्स गेम के लिए नामित किया. बहुत से साथी खिलाड़ियों ने यह कहते हुए उनके खेलने का विरोध किया कि कोर्ट में अगर मैजिक को चोट लगी तो उन्हें एड्स से इन्फ़ेक्टेड हो जाने का ख़तरा है. लेकिन मैजिक खेले और उनकी टीम 153-113 के स्कोर से जीती. मैजिक जॉन्सन इस दफ़े भी ‘ऑल-स्टार्स मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर’ घोषित किये गए. इसके अलावा उसी साल बार्सीलोना में हुए ओलिम्पिक में अमरीकी ‘ड्रीम टीम’ के साथ खेलते हुए उन्होंने गोल्ड-मैडल भी जीता.

उन दिनों एड्स को लेकर बहुत सी अफ़वाहें उड़ा करती थीं. 1992 में दूसरी बार रिटायर होने की घोषणा करते हुए इस खिलाड़ी ने जब टीवी पर एक भावपूर्ण सन्देश दिया तो उनके अनगिनत प्रशंसक सुबक उठे. तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर ने कहा: “मेरे लिए मैजिक एक हीरो हैं – खेल से प्यार करने वाले किसी भी आदमी के हीरो हैं वो”

1996 में अपने चाहने वालों को एक सुखद और आश्चर्यपूर्ण उपहार देने के तौर पर मैजिक जॉन्सन लेकर्स की तरफ़ से दुबारा कोर्ट पर उतरे और सैंतीस की आयु में एड्सग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने बत्तीस मैच खेले. इस के बाद उन्होंने तीसरी और आख़िरी बार रिटायरमेन्ट ले लिया.

इस के बाद एक अख़बार में उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए बताया कि वे दुनिया भर में एड्स के प्रति युवा पीढ़ी को सचेत करने के प्रयासों को अपना सारा समय देंगे. आज सोलह साल बीत चुकने के बाद मैजिक जॉन्सन उसी दिशा में कार्यरत हैं और अमरीका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा चलाए जा रहे बेशुमार एड्स जागरूकता अभियानों में हिस्सेदारी करते हैं और खेल से कमाई अकूत संपत्ति का बड़ा हिस्सा इन में दान भी करते हैं.

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