लोककथा : शेरू और श्याम

6 years ago

सावित्री ने आज घर पर ही रहने का फैसला किया. थकाऊ खेती के काम से आज उसे फुरसत मिली थी.…

ईश्वर ने हमें नहीं, हमने बनाया है ईश्वर को

6 years ago

जिड्डू कृष्णामूर्ति एक बार एक सभा को संबोधित कर रहे थे, तब किसी ने यह सवाल पूछा- कृपया इसका बिना…

बभूत मंतरना: जिसकी एक फूंक से छल-छिद्र छूमंतर हो जाता है

6 years ago

पहाड़ में छल-छिद्र, भूत-मसाण आये दिन लगे ही हुये. गाड़ गधेरे से चिपटने वाले छल-छिद्र तो घर के बुजुर्ग एक…

लोककथा : ह्यूंद की खातिर

6 years ago

पुरानी बात है जब दो वक्त की रोटी जुटाना ही बड़ी बात थी. उन्नत बीज और सही जानकारी न होने…

केदारनाथ पुनर्निर्माण पर जमीनी रपट

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16 नवम्बर 2020 को केदारनाथ धाम के कपाट यात्रियों के लिए बंद हो गए व केदार बाबा की डोली को…

हुम्ला-जुम्ला के घोड़े: पहाड़ी व्यापारियों के सबसे पसंदीदा घोड़े

6 years ago

आज भी जौलजीबी मेले का नाम सुनते ही लोगों के ज़हन में काली पार, एक खुले मैदान में खड़े घोड़ों…

लोककथा : दुबली का भूत

6 years ago

सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्रों में स्थायी निवास के साथ-साथ प्रायः एक अस्थाई निवास बनाने का चलन है, जिसे छानी या खेड़ा…

यादों में हमेशा जिंदा रहेगा अमरिया

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पड़ोस के गांव गंगनौला की चाची का परिवार टनकपुर के लिए पलायन कर गया तो उन्होंने अपनी दुधारू गाय सस्ते…

प्रथम विश्वयुद्ध के अनुभवों पर उत्तराखण्ड के अज्ञात सैनिक का रचा लोकगीत

6 years ago

आज से 102 साल पहले, साल 1918 के 11वें महीने का 11वां दिन और समय सुबह के ठीक 11 बजे.…

सुनिए शेरदा अनपढ़ की संगीतबद्ध कविता ‘को छै तू’

6 years ago

इस तरह आने वाली पीढ़ी विरासत को संभालते हुए सम्मान देती है, आगे बढ़ाने में अपना योगदान देती है. शेरदा…