जयमित्र सिंह बिष्ट

बर्फबारी के बाद अल्मोड़ा शहर : फोटो निबंध

बर्फ का गिरना किसी उत्सव से कम नहीं. कुदरत के इस इख्तियार पर इंसान बहुत कुछ लूटा देने को तैयार रहता है. बर्फबारी के सुकून भरे लम्हे ताउम्र भीतर कैद रहते हैं जिन्हें मौके-बे-मौके बस आँखें बंद कर जिन्दगी भर जीया जा सकता है. एक अरसे बाद अल्मोड़ा शहर के लोगों ने अपने शहर में बर्फ के फाहे गिरते देखे.   
(Almora Snowfall Photos 2022)

बर्फबारी के बाद अल्मोड़ा भी बर्फ की सफ़ेद चादर से ढक गया. बर्फ की इस सफेद चादर में अल्मोड़ा शहर बेइन्तहा खूबसूरत लगने लगा. कई सालों बाद इस तरह से गिरी बर्फ का अल्मोड़ा शहर के लोगों ख़ासकर बच्चों ने खूब आनन्द उठाया. बर्फ़बारी का आनन्द लोगों ने उठाना भी था जीवन में ऐसे मौके बार-बार कहाँ आते हैं.   
(Almora Snowfall Photos 2022)

अल्मोड़ा कैंट, ब्राइट एंड कॉर्नर और अल्मोड़ा शहर के बर्फबारी के दौरान ली गयी कुछ तस्वीरों का आनन्द लीजिये. सभी तस्वीरें काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी जयमित्र सिंह बिष्ट ने ली हैं.
(Almora Snowfall Photos 2022)

फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो: जयमित्र सिंह बिष्ट

जयमित्र सिंह बिष्ट
अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: बधाणगढ़ी से हिमालय के दृश्य

काफल ट्री का फेसबुक पेज : Kafal Tree Online

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

3 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

3 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

3 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

3 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

3 weeks ago