हैडलाइन्स

अल्मोड़ा में नर्सिंग की छात्राएं कर रही टॉयलेट की सफाई

अल्मोड़ा के जिस नर्सिंग कालेज के नाम पर कोई विधायक बन गया कोई सांसद का चुनाव जीत गया, उस नर्सिंग कालेज की आज हालत ठीक नहीं है. मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए आई छात्राएं इन दिनों बड़ी परेशानी से जूझ रही हैं. पांच माह से कॉलेज में सफाई कर्मचारी नहीं हैं.
(Almora Nursing Student)

प्रिंसपल ने अपनी ड्यूटी के तहत शासन को जानकारी दी. इससे भी चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने सफाई कर्मचारियों की तैनाती नहीं की. लिहाजा मजबूरन छात्राएं पढ़ाई के साथ साथ खुद सफाई का काम भी कर रही हैं. टॉयलेट की सफाई भी वह खुद कर रही हैं. इस वजह से छात्राएं परेशान हैं. उनका कहना है- एक तो उनको पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं है. अब उनको टॉयलेट की सफाई भी खुद करनी पड़ रही है.

वैसे अल्मोड़ा में मेडिकल कॉलेज के पास 11 नवंबर 2019 को नर्सिंग कालेज शुरू हुआ. अभी यहां पर पहले और दूसरे बैच की 87  छात्राएं हैं. जबकि थर्ड और फोर्थ बैच की 80 छात्राएं और आने वाली हैं. लेकिन कॉलेज में अभी पढ़ने वाली छात्राओं को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यहां पर सफाई के लिए ठेके में कर्मचारी रखे गए थे. इनका ठेका 31 अक्टूबर 2020 को खत्म हो गया. तब से यहां पर सफाई के लिए कोई कर्मचारी की तैनाती नहीं हो पाई है.
(Almora Nursing Student)

नतीजतन यहां पर रहने वाली छात्राए और कर्मचारी खुद सफाई कर रहे हैं. छात्रा सैलजा नेगी, मानसी बिष्ट, तृप्ति पांडेय, महिमा पांडेय ने बताया कि उनको पढ़ाने के लिए अभी सिर्फ 2 ट्यूटर है. अन्य पदों में कोई तैनाती नहीं की गई है. किसी तरह वह अपनी पढ़ाई बिना प्रैक्टिकल के पूरी कर रही हैं. लेकिन बीते पांच माह से सफाई कर्मचारी नहीं होने की वजह से अपने टॉयलेट सहित अन्य सफाई का कार्य भी खुद कर रही हैं.

इस वजह से उनके अभिभावक भी तनाव में हैं. छात्राओं ने कहा कि उनके अभिभावकों ने यहां उनको मेडिकल की पढ़ाई के लिए भेजा था, लेकिन उनको यहां पर टॉयलेट की सफाई करनी पड़ रही है. जबकि नर्सिंग कालेज की प्रभारी प्रिंसिपल आशा गंगोला ने पूछने पर बताया कि पांच माह से सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं होने से छात्राएं और कर्मचारी खुद सफाई का काम कर रहे हैं. ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार मेडिकल शिक्षा को लेकर कितना गंभीर है.
(Almora Nursing Student)

प्रमोद डालाकोटी 

हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

कई प्रमुख दैनिक अख़बारों में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद डालाकोटी वर्तमान में अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए काम कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें: कोरोना से लड़ती उत्तराखण्ड की महिलाएं कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

12 hours ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

12 hours ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

13 hours ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

4 days ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

5 days ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

5 days ago