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विलुप्ति की कगार पर पहाड़ का एक लोकदेवता

कुमाऊं के रास्तों में अनेक जगह पर आपको ऐसी टीलेनुमा आकृति मिल जायेगी जहां पर लोग आस्था के साथ पत्थर चढ़ाते हैं. क्या आप जानते हैं पहाड़ों के इस स्थानीय देवता का क्या नाम है?

कुमाऊं में इस तरह के मंदिर मुख्य रूप से मानसरोवर यात्रा के मार्ग पर पाये जाते हैं. किसी ऊँचे स्थान पर बने इन मंदिरों को मार्गदर्शक देवता का मंदिर माना जाता है. मार्गदर्शक का मतलब है रास्ता दिखाने वाला देवता. स्थानीय बोली में इस देवता को कठपतरिया देवता कहा जाता है.

कठपतरिया को ही बहुत से गांवों में इसे कठपतिया बूबू भी कहा जाता है. कठपतिया बूबू के मंदिर अधिकांशतः गांव को जाने वाले पैदल रास्ते में ऊंची चोटी पर होते हैं. इन चोटियों से एक स्थान से दूसरा स्थान आसानी से देखा जा सकता है.

कुछ गावों में कठपतिया बूबू के मंदिर में एक परम्परा यह भी देखी गयी है कि लोग जंगल को जाते समय इसमें पेड़ की छोटी टहनी रख देते जिसे आते समय उठा लेते.

हो सकता है इन्हीं स्थानीय मान्यता के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान यात्रियों ने इस स्थानीय देवता को पूजना शुरू किया हो.

इसतरह का मंदिर आप चित्तई मंदिर से कुछ दूरी पर अल्मोड़ा मार्ग पर आज भी देख सकते हैं इस मंदिर में आज भी बहुत से राहगीर पत्थर चढ़ाते हैं और अपनी यात्रा के मंगलमय होने की कामना कठपतरिया देवता से करते हैं.

पहाड़ में सड़कें आने के बात कठपतिया बूबू लापता से हो गये. आज की पीढ़ी में शायद ही किसी की स्मृति में कठपतिया बूबू हों. समय के साथ पैदल मार्ग समाप्त हुए और उन्हीं के साथ समाप्त हुआ पहाड़ का एक स्थानीय देवता.

-काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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