Featured

असल झण्डा छूने तक को न मिला – वीरेन डंगवाल की कविता ‘पन्द्रह अगस्त’

पन्द्रह अगस्त 
- वीरेन डंगवाल

सुबह नींद खुलती 
तो कलेजा मुंह के भीतर फड़क रहा होता 
ख़ुशी के मारे 
स्कूल भागता 
झंडा खुलता ठीक ७:४५ पर, फूल झड़ते 
जन-गण-मन भर सीना तना रहता कबूतर की मानिन्द 
बड़े लड़के परेड करते वर्दी पहने शर्माते हुए 
मिठाई मिलती 

एक बार झंझोड़ने पर भी सही वक़्त पर 
खुल न पाया झण्डा, गांठ फंस गई कहीं 
हेडमास्टर जी घबरा गए, गाली देने लगे माली को 
लड़कों ने कहा हेडमास्टर को अब सज़ा मिलेगी 
देश की बेइज़्ज़ती हुई है 

स्वतंत्रता दिवस की परेड देखने जाते सभी 
पिताजी चिपके रहते नए रेडियो से 
दिल्ली का आंखों-देखा हाल सुनने 

इस बीच हम दिन भर 
काग़ज़ के झण्डे बनाकर घूमते 
बीच का गोला बना देता भाई परकार से 
चौदह अगस्त भर पन्द्रह अगस्त होती 
सोलह अगस्त भर भी 

यार, काग़ज़ से बनाए जाने कितने झण्डे 
खिंचते भी देखे सिनेमा में 
इतने बड़े हुए मगर छूने को न मिला अभी तक 
कभी असल झण्डा 
कपड़े का बना, हवा में फड़फड़ करने वाला 
असल झण्डा 
छूने तक को न मिला!

वीरेन डंगवाल (1947-2015)

वीरेन डंगवाल (5 अगस्त 1947 – 27 सितम्बर 2014) समकालीन हिन्दी कविता के सबसे लोकप्रिय कवियों में गिने जाते हैं. साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता इस कवि के तीन कविता संग्रह – ‘इसी दुनिया में’, ‘दुश्चक्र में सृष्टा’ और ‘स्याही ताल’ प्रकाशित हुए. हाल ही में उनकी सम्पूर्ण कविताएँ नवारुण प्रकाशन से छपकर आई हैं.

“हर कवि की एक मूल संवेदना होती है जिसके इर्द-गिर्द उसके तमाम अनुभव सक्रिय रहते हैं. इस तरह देखें तो वीरेन के काव्य व्यक्तित्व की बुनियादी भावना प्रेम है. ऐसा प्रेम किसी भी अमानुषिकता और अन्याय का प्रतिरोध करता है और उन्मुक्ति के संघर्षों की ओर ले जाता है. ऐसे निर्मम समय में जब समाज के लोग ज्यादातर घृणा कर रहे हो और प्रेम करना भूल रहे हो, मनुष्य के प्रति प्रेम की पुनर्प्रतिष्ठा ही सच्चे कवि का सरोकार हो सकता है” – मंगलेश डबराल

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा

बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ…

1 week ago

दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है

हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन इन्हीं दिनों यानी जून के तीसरे-चौथे हफ़्ते में सलीके…

1 week ago

उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी

पिछली कड़ी : एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता हिमालय को जानने समझने व…

3 weeks ago

एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!

आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस…

3 weeks ago

रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन

पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का…

3 weeks ago

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

1 month ago