हैडलाइन्स

घसियारिनों का चालान

वीडियो हेलंग गांव का है. चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड की उर्गम गांव का एक बेहद सुंदर गांव है हेलंग. वीडियो में हेलंग गांव की महिलाओं और पुलिस व सीआईएसएफ के बीच एक झड़प का है. झड़प घास को लेकर है. घास, हेलंग गांव के चारागाह की घास जो अब टीचडीसी का डम्पिंग ज़ोन है. अपने पुरखों की जमीन पर हेलंग गांव के लोगों का कोई अधिकार नहीं रहा है. पुलिस और सीआईएसएफ की चालान काटने की कारवाई कानून सम्मत है. शायद यही पहाड़ की नियति भी है.
(Village Women Chalan Helang)

किसे पता था जब टीएचडीसी जलविद्युत परियोजना के लिए गांव की कौन-कौन सी भूमि ले लेगी. बड़ी-बड़ी परियोजनाएं जब पहाड़ों पर चढ़ती है तो पहला सपना स्थानीय लोगों को रोजगार का दिया जाता है. यह रोजगार ही तो जिसके लिये पुरखे पहाड़ छोड़ते थे और यही रोजगार है जिसके लिये आज भी पहाड़ से निकलने वाली बसें उदास आँखों से भरी मिलती हैं.

रोजगार मिलता है जहां-जहां शारीरिक बल की जरूरत होती है वहां पहाड़ियों के लिये अवसर खुले रहते हैं पर जब कुर्सी पर बैठने वाले काम शुरु होते हैं स्थानीय पहाड़ियों की छंटनी शुरु होती है. कहीं मिल गयी तो गेटकीपर की कुर्सी के विकल्प उनके लिये सीधे तौर पर खुले रहते हैं.
(Village Women Chalan Helang)

रोजगार के सुनहरे सपने के आगे पहाड़ के भोले लोग कहीं भी हस्ताक्षर करने को तैयार होते हैं. कौन नहीं चाहेगा उसका बच्चा घर के आगे ही नौकरी कर ले. पर धीरे-धीरे बड़ी कम्पनी पाने पैर जमाती है और उनके अधिकार छिनती है. किसी को पता नहीं चलता कागजों पर कम्पनी के हक़ किस कदर बड़ जाते हैं.

एक समय बाद सबकुछ कानून के मुताबिक़ होता है. मसलन हेलांग के आस-पास की घटनाओं को लीजिए. यहां आज का कल अपने चरागाहों से घास काटने पर चालान काटे जाते हैं जबकि यही एक महीने पहले जब टीएचडीसी ने बड़े-बड़े पेड़ काटे. कानून के हिसाब से घास काटना जुर्म है लेकिन पेड़ काटना कानून सम्मत.
(Village Women Chalan Helang)

काफल ट्री फाउंडेशन

Support Kafal Tree

.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • कौन इन घस्यारियों के आँसू पोछेगा?

  • ये बहुत दुखद है . जिस राज्य में भू माफिया पार्टियों का झंडा लगा कर वन पंचायतों की भूमि को बेच रहे हो , खनन कररहे हों , खुले आम दुर्लभ प्रजाति के दशकों पुराने पेड़ों को सुखा कर बेच रहे हों, दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के घर का नाश कर सरकारी सार्वजानिक वन भूमि की प्लोटिंग कर बेच रहे जिससे वन्य जीवन का नाश हो रहा है , वहाँ सिर्फ घास काटने को लेकर पर्वतीय महिलाओं को रुलाना उसकी प्रार्थना को उनसुना करना किसी भी ढंग से उचित नहीं ठहराया जा सकता . जब वो काटने गयी घास तो क्यों नही रोका गया ? जिस प्रदेश में वन भूमि को ऊँची सांठ - गाँठ के जरिये बेचा जा रहा हो वहा ऐसा व्यवहार उचित प्रतीत नहीं होता . इस स्तिथि को भिन्न ढंग से बिना उस असहाय महिला के आंसू बहाए सम्भाला जा सकता था . विडियो मन की व्यथित कर देने वाला है . इसी सन्दर्भ की खबर में ये बात भी सामने आयी है अन्य प्रकाशनों से कि किसी वन सरपंच की मंजूरी थी मैदान बनाने की . वन पंचायत नियमावली 2005 के अनुसार सरपंच को वन भूमि को मैदान बनाने के लिए मंजूरी देने का अधिकार नहीं है . तो मैदान बन कैसे रहा था ? इस घटना में पुलिस का कोई दोष नही है . वे केवल आदेशॉ का पालन कर रहे हैं , अतः आदेश इस ढंग से इस स्तिथि को संभालने के जहां से भी आये उनको चिंतन करना है . इस घटना में पश्चाताप की धारा में स्नान ही करना एक विकल्प है . विडियो बहुत ही व्यथित कर देने वाला है . घास गाय के लिए थी और वो महिला कह भी रही है . दुबारा इतनी घास काटने में उसे रात हो जायेगी ,और अगर ये घास जब्त भी हो गयी होगी तो सूख ही जायेगी पर गाय के भूखे रहने का पाप हम गौ - पूजकों के लिए असहनीय है . विडियो में दोनों महिलाएं रो रही हैं . यहाँ ये बात ध्यान देने की है इसी घास को काटने के चक्कर में पहाड़ आये दिन कई महिलाएं गिर कर दर्दनाक मृत्यु पाती हैं . ये बात सत्य है कि घास का कटान एक निश्चित ढंग से होना अनिवार्य है ताकि नयी वनस्पतियाँ उग सके . पर जब वन भूमि ही प्लोटिंग कर बेच दी जा रही हो तो ऐसे में इन घास काटने की वाली महिलाओं को रुलाना इतना अनुचित है की अब पुष्करदा को हस्तक्षेप करना ही चाहिए, वे दयालू हैं और इन महिलाओं के आंसू दूर तलक आँखों और मन में गीलापन कर रहे हैं . आंसू पोछने की आवश्यकता है ऐसे में जब रायता फ़ैल ही गया हो , जय उत्तरखंड ,जय भारत , -गोविन्द गोपाल , दनिया , अल्मोड़ा

Recent Posts

बर्फ ही नहीं हरियाली भी गायब हो रही है हिमालयी इलाकों से

हिमालय को आमतौर पर बर्फ़, जंगल और हरियाली का प्रतीक माना जाता है, लेकिन एक…

4 days ago

उत्तराखंड क्रिकेट टीम से रचा इतिहास

उत्तराखंड क्रिकेट ने रविवार को एक नया इतिहास रच दिया. राज्य की टीम ने जमशेदपुर…

4 days ago

उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर

लेखे के नये लाल बैग से निकला निर्मल बजट उत्साह संवर्धन नीति का पिटारा लाया…

1 week ago

बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’

कोटद्वार में बाबा की दुकान का नाम बदले जाने और बजरंग दल से भिड़ने वाले…

1 week ago

कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?

पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा भगवान लकुलीश को भारतीय शैव परंपरा के विकास में एक अत्यंत…

1 week ago

कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?

नारायण आश्रम उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में धारचूला से ऊपर, ऊँचे पहाड़ों और गहरी घाटियों…

1 week ago