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उत्तराखण्ड हाईकोर्ट में शराबबंदी की लड़ाई लड़ने वाले शख्श की कहानी

1950 में जीवनयापन  के लिए खार मुंबई में टैक्सी चला परमानन्द जोशी दरसानी गरुड़ से प्रवास कर गए. उनके बेटे डी. के. जोशी ने ट्यूशन आदि कई धंधे कर 1990 में अल्मोड़ा महाविद्यालय में 1990 में बीएससी में प्रवेश पाया. राशन-पानी के जुगाड़  के लिए गांव लौटे तो हफ्ते भर से ज्यादा की गुंजाइश न थी. पर पढ़ना  भी था, कुछ बनना भी था. सो गांव  की चक्की में तीन  हज़ार रुपये माह पर लग गए. इसी बीच 1993 में एमए अंग्रेजी से किया. इसके बाद फिर अल्मोड़ा कॉलेज से एलएलबी किया.

मिलन चौक में कोचिंग शुरू कर फिर जीवनयापन का नया दौर शुरू किया. 1996 में विमला से शादी हुई, 1997 में बेटा हुआ जो अब बीटेक  कर चुका है. 1999 में नंदादेवी में कोचिंग खोली में जो अभी भी चल रही है. पर वकालत के साथ इसे चलाना नहीं भाया.

एडवोकेट डी. के. जोशी

वकालत को इस संकल्प के साथ चुना कि सामाजिक बुराइयों को दूर करना है. व्यसन मुक्त समाज की ओर चेतना फैलानी है. अब कोचिंग छोड़ी ओर पूरी ताकत  से वकालत की मर्यादा के संकल्प का व्रत लिया. प्रण किया कि अपराध ओर घिनौने धंधे में नहीं फसूंगा. ऐसा कोई केस आजतक नहीं लिया.

गर्मी बर्दास्त नहीं होती तो 2005 से नैनीताल हाई कोर्ट की छाँव में आ बसे. दिसम्बर 2005 को नैनीताल हाई कोर्ट में पंजीकृत हुए. यहां एडवोकेट मनोज तिवारी की छत्र-छाया मिली, जो अब जज हैं.

2006 से जन हित के मुद्दे बुलंद करना शुरू किया. जो फंस गए हैं, घिर गए हैं न्याय की चौखट पे. बिन पैसे जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता वे अब इनके पात्र बने. विवेकानंद का दर्शन को अपनाया कि कैसे अपने दिल की सही आवाज़ प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूल बना देती है. ओशो के दर्शन से वैचारिक संतुलन की समझ आई. अर्थशास्त्री रोबर्ट टी क्योसकी से सीखा मूल्यों का चक्र.

20 अगस्त 2011 से बलदेव सिंह बनाम राज्य सरकार का केस लड़ा. हौसला बढ़ा. जनहित, जनशिकायत, समस्या समाधान शिविर से जन-जन का साथ जुटा. रुपया संपत्ति का मायाजाल दूर ही रखा.

10 जुलाई 2018 को गरुड़ के कूड़ा निस्ताराण की पीआइअल (2015) में राज्य सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिये गए. यह पीआइअल 2017 में डाली थी. इसी तरह स्वास्थ्य सेवा नागरिक सेवा अल्मोड़ा में 11 लाख की डायलिसिस मशीन के जंक खाने,  बाल विवाह संरक्षण व नैनीसार के मामलों को सुलझाया. अभी पंचेश्वर पर निर्णय बाकी है.

अब शराबबंदी के मामले पर माननीय चीफ जस्टिस रमेश रंगनाथन व माननीय न्यायमूर्ति अलोक कुमार वर्मा ने आदेश दिया है. अंतिम फैसला आना है. जो जनमत  आर्थिक स्थिति पोषण जीवनस्तर, मद्य निषेध से लगे क्षेत्र जैसे कई पक्ष संजोये है.

हाल ही में इन्हीं डी. के. जोशी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उत्तराखण्ड हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को मध्य निषेध हेतु चरणबद्ध तरीके से शराबबंदी नीति बनाने का आदेश दिया है. इसके प्रथम चरण में तत्काल शराब की दुकानों, बार व रेस्टोरेंट्स में आईपी एड्रेस युक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने, 21 साल से कम आयु के व्यक्ति को शराब सेवन और खरीददारी के लिए प्रतिबंधित करने वाले प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया.

हाई कोर्ट की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी आदेश दिया कि सरकार 6 माह के भीतर चरणबद्ध शराबबंदी हेतु नीति भी प्रस्तुत करे.   

जीवन भर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल महाविद्यालयों में अर्थशास्त्र की प्राध्यापकी करते रहे प्रोफेसर मृगेश पाण्डे फिलहाल सेवानिवृत्ति के उपरान्त हल्द्वानी में रहते हैं. अर्थशास्त्र के अतिरिक्त फोटोग्राफी, साहसिक पर्यटन, भाषा-साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, इतिहास और लोक पर विषदअधिकार रखने वाले मृगेश पाण्डे काफल ट्री के लिए नियमित लेखन करेंगे.

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Sudhir Kumar

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