Sundar Chand Thakur Memoir

मैं पहाड़ों को जन्म से जानता हूं, अपने पिता की तरहमैं पहाड़ों को जन्म से जानता हूं, अपने पिता की तरह

मैं पहाड़ों को जन्म से जानता हूं, अपने पिता की तरह

सुन्दर चन्द ठाकुर के कॉलम पहाड़ और मेरा जीवन – अंतिम क़िस्त (पिछली क़िस्त:  मैं बना चौबीस रोटियों का डिनर…

5 years ago
मैं बना चौबीस रोटियों का डिनर करने वाला भिंडी पहलवानमैं बना चौबीस रोटियों का डिनर करने वाला भिंडी पहलवान

मैं बना चौबीस रोटियों का डिनर करने वाला भिंडी पहलवान

पहाड़ और मेरा जीवन – 66 (पिछली क़िस्त: और यूं एक-एक कर बुराइयां मुझे बाहुपाश में लेती गईं जिम शब्द का…

5 years ago
वो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जानावो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जाना

वो मेरा ‘काटो तो खून नहीं’ मुहावरे से जिंदा गुजर जाना

पहाड़ और मेरा जीवन – 64 (पिछली क़िस्त:  सुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफ )…

5 years ago
सुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफसुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफ

सुंदर लाल बहुगुणा से जब मिला मुझे तीन पन्ने का ऑटोग्राफ

पहाड़ और मेरा जीवन – 63 (पिछली क़िस्त: और मैंने कसम खाई कि लड़कियों के भरोसे कॉलेज में कोई चुनाव…

5 years ago