Story by Gyanranjan

ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’

ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’

श्रीमती ज्वेल जब यहाँ आकर बसीं तो लगा कि मैं, एकबारगी और एकतरफा, उनसे फँस गया हूँ और उन्हें छोड़…

4 years ago
ज्ञानरंजन की कहानी ‘पिता’ज्ञानरंजन की कहानी ‘पिता’

ज्ञानरंजन की कहानी ‘पिता’

उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई. बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे.…

4 years ago