Chandrakunwar Bartwal Poem

चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविता ‘काफल पाक्कू’चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविता ‘काफल पाक्कू’

चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविता ‘काफल पाक्कू’

हे मेरे प्रदेश के वासीछा जाती वसन्त जाने से जब सर्वत्र उदासीझरते झर-झर कुसुम तभी, धरती बनती विधवा सीगंध-अंध अलि…

4 years ago