बटरोही का कॉलम

उत्तराखंड की पहली प्रकाशक बिटियाउत्तराखंड की पहली प्रकाशक बिटिया

उत्तराखंड की पहली प्रकाशक बिटिया

अप्रत्याशित खबर की तरह हिंदी समाज की जुबान पर ‘दून लिटरेचर फेस्टिबल 2016’ छा गया. मुख्य परिकल्पना उत्तराखंड की दो…

3 years ago
नैनीताल की झील में एक खतरनाक जीवाणु का घर हैनैनीताल की झील में एक खतरनाक जीवाणु का घर है

नैनीताल की झील में एक खतरनाक जीवाणु का घर है

यह शोध हमारे विश्वविद्यालय में वनस्पति-विज्ञान के प्रोफ़ेसर साहब ने किया था. हिंदी समाज के आम प्राध्यापक की तरह वो…

4 years ago
आजादी के बाद पहाड़ों में खलनायक ही क्यों जन्म ले रहे हैंआजादी के बाद पहाड़ों में खलनायक ही क्यों जन्म ले रहे हैं

आजादी के बाद पहाड़ों में खलनायक ही क्यों जन्म ले रहे हैं

हमारी धरती में नायकों की कभी कमी नहीं रही. चाहे जितने गिना लीजिए. आजादी से पहले भी, और बाद में…

5 years ago
जिन्दगी में तीन सम्बन्ध कभी नहीं मिटतेजिन्दगी में तीन सम्बन्ध कभी नहीं मिटते

जिन्दगी में तीन सम्बन्ध कभी नहीं मिटते

17 जुलाई, 1969 को ठीक पचास साल पहले, आज ही के दिन. Tara Chandra Tripathi Memoir by Batrohi डिग्री कॉलेज…

5 years ago
बच्चों को एमए, पीएच.डी. की डिग्री देने वाला अनपढ़ कवि शेरदाबच्चों को एमए, पीएच.डी. की डिग्री देने वाला अनपढ़ कवि शेरदा

बच्चों को एमए, पीएच.डी. की डिग्री देने वाला अनपढ़ कवि शेरदा

जब से मैंने शेरदा की किताब ‘मेरि लटि पटि’ अपनी यूनिवर्सिटी में एमए की पाठ्यपुस्तक निर्धारित की, एकाएक पढ़े-लिखे सभ्य…

5 years ago
तनावहीन चेहरे वाला एक लेखक : पंकज बिष्टतनावहीन चेहरे वाला एक लेखक : पंकज बिष्ट

तनावहीन चेहरे वाला एक लेखक : पंकज बिष्ट

पहली मुलाक़ात में ही मैंने महसूस किया था कि हम दोनों के बीच कई चीजें समान होते हुए भी वह…

5 years ago
‘गहन है यह अंधकारा’ की समीक्षा : लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’‘गहन है यह अंधकारा’ की समीक्षा : लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’

‘गहन है यह अंधकारा’ की समीक्षा : लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’

औपनिवेशिक मूल्यों की तलछट पर बिछा एक लाचार समाज भारत को आज़ादी तो 1947 में मिल चुकी थी; मगर आज…

5 years ago
नया साल और गहरे अवसाद का बीच हम लोगनया साल और गहरे अवसाद का बीच हम लोग

नया साल और गहरे अवसाद का बीच हम लोग

हम लोग, जो आजादी के आस-पास पैदा हुए हैं, सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि हमारे समाज का…

5 years ago
घाम दीदी इथकै आ, बादल भिना उथकै जाघाम दीदी इथकै आ, बादल भिना उथकै जा

घाम दीदी इथकै आ, बादल भिना उथकै जा

अब ऐसे नज़ारे कम दिखाई देते हैं, मगर हमारे छुटपन में जब पहाड़ों का आकाश हर वक़्त बादलों से घिरा…

5 years ago
क्या आपने पहाड़ी बकरी को चरते देखा है?क्या आपने पहाड़ी बकरी को चरते देखा है?

क्या आपने पहाड़ी बकरी को चरते देखा है?

कहते हैं, संसार का सबसे निरापद और स्वादिष्ट जीव बकरी है. उस पर अगर वो पहाड़ी हो तो क्या कहने.…

6 years ago