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सरकार की अनसुनी से आहत स्वामी सानंद ने अनशन के 112वें दिन प्राण त्याग दिए

112 दिनों से आमरण अनशन कर रहे 86 वर्षीय स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का आज दोपहर ऋषिकेश में निधन हो गया. बीते दिन पुलिस ने जबरन उन्हें अनशन स्थल से उठाकर एम्स में भर्ती कराया था. लेकिन अस्पताल में भी उन्होंने अनशन नहीं तोड़ा. उनका निधन उस समय हुआ जब उन्हें हरिद्वार से दिल्ली लाया जा रहा था.

गंगा में अवैध खनन, बांधों जैसे बड़े निर्माण और उसकी अविरलता को बनाए रखने के मुद्दे पर पर्यावरणविद स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद यानी प्रो. जीडी अग्रवाल अनशन पर थे. फरवरी 2018 में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख गंगा के लिए अलग से क़ानून बनाने की मांग की थी. कोई जवाब ना मिलने पर स्वामी सानंद 22 जून को अनशन पर बैठ गए थे. इस बीच दो केंद्रीय मंत्री उमा भारती और नितिन गडकरी उनसे अपना अनशन तोड़ने की अपील की थी, लेकिन वो नहीं माने.

गंगा की सफाई के मुद्दे पर स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 2012 में आमरण अनशन पर बैठे थे. बाद में सरकार की ओर से अपनी मांगों पर सहमति मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया.

गंगा की सफाई न होने पर प्राण देने का वचन देने वाली उमा भारती ने तो विभाग छोड़ दिया लेकिन प्राण स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद को त्यागने पड़े. स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का आरोप था कि बीजेपी सरकार गंगा के प्रति चाहे जितनी आस्था जताए, विकास के नाम पर वह सबकुछ करती रही जिससे गंगा का जीवन ख़तरे मे है.

फोटो http://www.mediavigil.com से साभार

13 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. इस पात्र का कोई जवाब नहीं आने पर 22 जून से उन्होंने अपना आमरण अनशन शुरू कर दिया था. उन्होंने गंगा रक्षा के संबंध में एक ड्राफ्ट तैयार किया था जिसके आधार पर एक्ट बनाने के लिए सरकार को 9 अक्टूबर तक का समय दिया था. सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था. 10 अक्टूबर से उन्होंने जल त्याग कर दिया.

स्वामी सानंद के निधन के आहत और गुस्साए मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया है कि सांनद की हत्या हुई है. उन्होंने कहा कि बुधवार को सानंद को एम्स ले जाते वक्त मैंने कहा था कि वहां उनको मार दिया जाएगा और वैसा ही हुआ.

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद का जन्म 1932 में मुज़्ज़फ़रनगर के काँधला में हुआ था. उनका मूल नाम गुरु प्रसाद अग्रवाल था. उन्होंने आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. कैलीफोर्निया युनिवर्सिटी से उन्होंने एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की थी. करियर की शुरुआत उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग से की थी. बाद में वे आईआईटी कानपुर मे पढ़ाने लगे और वहाँ सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष बने. वे केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के पहले सदस्य सचिव थे. 2011 में उन्होंने संन्यास की दीक्षा ली और प्रो.गुरुदास अग्रवाल से स्वामी सानंद हो गए.

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Girish Lohani

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