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उत्तराखण्ड में पहले आठ महीनों में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 694

गंगोत्री राजमार्ग पर टेंपो ट्रेवलर भागीरथी नदी में शुक्रवार शाम को गिर गया. जिसमें अब तक 8 लोगों की मृत्यु की खबर मिली है. उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बड़ा है. बात अगर केवल  2018 की करें तो फरवरी माह में चंपावत जिले में मैक्स गिरने से दस लोगों की मृत्यु हुई, 14 मार्च को अल्मोड़ा से रामनगर जा रही बस में 13 लोगों की म्रत्यु हुई, एक जुलाई को धूमाकोट हादसे में 48 मौत हुई, 19 जुलाई को ऋषिकेश गंगोत्री हाईवे पर बस गिरने से 14 लोगों की मौत हो गयी, जुलाई के ही महिने अल्मोड़ा में पांच लोगों की मृत्यु हुई, गंगोत्री में शुक्रवार को हुई सड़क दुर्घटना राज्य में इस माह हुई दूसरी सड़क दुर्घटना है.

2018 के पहले आठ महीनों में उत्तराखंड में दुर्घटनाओं का प्रतिशत तो 7 प्रतिशत कम हुआ है लेकिन दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2017 के पहले आठ महीनों की 1049 एक्सीडेंट के मुकाबले 2018 के पहले आठ महीनों में 976 एक्सीडेंट हुए हैं. 2018 में जनवरी से लेकर अगस्त तक हुए एक्सीडेंट में मरने वालों की संख्या 694 है जो इसी दौरान पिछले साल 641 थी. 2016 में राज्य में एक्सीडेंट में 10% प्रतिशत की  दर्ज की गई थी. 2017 में राज्य में सड़क दुर्घटना में मरने वालों की कुल संख्या 942 थी जो 2016 में 962 थी. राज्य में हुई कुल सड़क दुर्घटनाओं का 82 प्रतिशत देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधमसिंह नगर चार जिलों में ही घटा है.

सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि टिहरी और पौढ़ी जिले में दर्ज की गई है. टिहरी और पौढ़ी में अब तक इस साल 72 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हो चुकी है. राज्य में सड़क दुर्घटना में सर्वाधिक उधम सिंह नगर में 115 लोगों की मौत दर्ज की गयी है.

राज्य में प्रत्येक सड़क हादसे के बाद एक जांच कमेटी बैठाई जाती है जो पिछले 17 सालों से  सड़क हादसों की प्रमुख वजह ओवर लोडिंग, सड़कों का खराब रख-रखाव, अनफिट वाहनों पर कारवाई न होना, बिना हैवी लाइसेंस के हैवी ड्राइविंग करना बता रही है.

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Girish Lohani

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