Default

राज्य स्थापना दिवस पर उत्तराखंड की अद्भुत तस्वीरें

उत्तराखंड राज्य को बने इक्कीस साल होने को आये हैं इन इक्कीस सालों में पर्यटन और पर्यटन के नाम पर न जाने कितनी सरकारें आई और गई. राज्य स्थापना से पहले ही पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का आधार बना दिया गया था. राज्य सरकार के पास एक ऐसा आंकड़ा नहीं है जो यह बता सके कि राज्य में पर्यटन से कितने लोगों की आजीविका चल रही है. Photos of Uttarakhand

इन सालों में सरकार के पास ऐसी कोई सूची नहीं है जो बता सके कि राज्य में कितने पर्यटक स्थल हैं. सालों से हमने वह भुनाया है जो अंग्रेज छोड़ गये. आज भी उत्तराखंड से बाहर से रहने वाले किसी आम व्यक्ति से उत्तराखंड में पर्यटक स्थल के नाम पूछिये तो मसूरी, नैनीताल के बाद उसे तीसरा कोई नाम शायद ही याद हो. हां हरिद्वार के बहाने ऋषिकेश की मौज पिछले पांच एक सालों में दिल्ली एनसीआर वालों ने खूब ली है. Photos of Uttarakhand

धन्य हो यहां के देवी-देवता जिसने उत्तराखंड सरकार की लाज बचाकर रखी है. हरिद्वार, बद्रीनाथ और केदारनाथ के नाम पर उसके पास पर्यटन दिखाने भर का राजस्व तो हो ही जाता है.

-काफल ट्री डेस्क.

राज्य स्थापना दिवस पर देखिये उत्तराखंड के विभिन्न पर्यटक स्थलों की अद्भुत तस्वीरें. सभी तस्वीरें अमित साह ने ली हैं.

बेरीनाग से नंदा देवी. फोटो : अमित साह
बेदनी. फोटो : अमित साह
केदारनाथ. फोटो : अमित साह
गरुड़. फोटो : अमित साह
चंद्रशिला. फोटो : अमित साह
टिहरी का एक गांव. फोटो : अमित साह
फोटो : अमित साह
लैंसडाउन. फोटो : अमित साह
छियालेख. फोटो : अमित साह
पंचाचूली. फोटो : अमित साह
चौकोरी. फोटो : अमित साह
ॐ पर्वत. फोटो : अमित साह
हर्षिल. फोटो : अमित साह

फोटोग्राफर अमित साह ने बीते कुछ वर्षों में अपने लिए एक अलग जगह बनाई है. नैनीताल के ही सीआरएसटी इंटर कॉलेज और उसके बाद डीएसबी कैंपस से अपनी पढ़ाई पूरी करते हुए अमित ने बी. कॉम. और एम.ए. की डिग्रियां हासिल कीं. फोटोग्राफी करते हुए उन्हें अभी कोई पांच साल ही बीते हैं.

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • उ ख राज्य बनने से सुधार भले ही न हुआ हो या नगण्य हुआ हो पर मुझे आज इसके राज्य स्थापना दिवस होने पर गर्व अवश्य है क्योंकि मैं ठेठ उत्तराखंडी हूँ।

Recent Posts

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 weeks ago

जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि

भाषाओं का इतिहास हमेशा रोचक रहा है. दुनिया की कई भाषाओं में ऐसे शब्द मिलते…

2 weeks ago

आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’

उत्तराखंड को केवल 'देवभूमि' ही नहीं, बल्कि उत्सवों की भूमि कहना भी बिल्कुल सटीक होगा. यहाँ साल भर…

2 weeks ago

द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा

‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म…

3 weeks ago

हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता

कुमाऊं-गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के लिए भिन्न प्रशासन, विशेष नीति या मैदानी भागों से भिन्न व्यवस्था…

3 weeks ago

पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया

बीते दिन सुबह लगभग चार बजे एक ऐसी खबर आई जिसने कौसानी और लक्ष्मी आश्रम…

3 weeks ago