आखिरकार एक साल के इंतजार के बाद एक बार फिर से नंदा के जयकारों से पूरे पहाड़ का लोक नंदामय हो गया है. 31 अगस्त से नंदा के मायके में नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा शुरू हो गयी है. नंदा धाम कुरूड के सिद्ध पीठ मंदिर में श्रद्धालुओं नें नंदा के पौराणिक लोकगीतों और जागर गाकर हिमालय की अधिष्टात्री देवी माँ नंदा को हिमालय के लिये विदा किया.
(Nanda Rajjat 2021)
इस अवसर पर दूर-दूर से आये श्रद्धालुओं की आंखें छलछला गयी. खासतौर पर ध्याणियां मां नंदा की डोली को कैलाश विदा करते समय फफककर रो पड़ी. बीते दिन से शुरू नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा 13 सितम्बर को उच्च हिमालयी बुग्यालों में सम्पन्न होगी.
गौरतलब है कि नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा सिद्धपीठ कुरुड मंदिर से शुरू होती है. यहाँ से प्रस्थान कर राजराजेश्वरी बधाण की नंदा डोली बेदनी बुग्याल में, कुरुड दशोली की नंदा डोली बालपाटा बुग्याल और कुरुड बंड भुमियाल की छ्न्तोली नरेला बुग्याल में नंदा सप्तमी/ अष्टमी के दिन पूजा अर्चना कर, नंदा को समौण भेंट कर लोकजात संपन्न होती है. नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा शुरू होने पर एक बार फिर पूरा सीमांत जनपद चमोली नंदामय हो गया है.
(Nanda Rajjat 2021)
सीमांत जनपद चमोली में प्रत्येक साल भादों के महीनें नंदा सप्तमी/ अष्टमी की यात्रा अर्थात नंदा की वार्षिक लोकजात आयोजित होती है. जनपद के 7 विकासखंडों के 800 से अधिक गांवों व अलकनंदा, बंड पट्टी, बिरही, कल्प गंगा, नंदाकिनी, पिंडर घाटी की सीमा से लगे गांवों के लोग इस लोकोत्सव में शामिल होते हैं.
नंदा की यह वार्षिक लोकजात 12 वर्ष में आयोजित होने वाली नंदा देवी राजजात से कई मायनों में बेहद वृहद और भव्य होती है. लोकजात के दौरान गांवों से लेकर डांडी-कांठी माँ नंदा के जागरों से गुंजयमान हो जाती है. साथ ही दांकुडी, झोडा, चांचरी, की सुमधुर लहरियों से माँ नंदा का मायका अलौकिक हो जाता है.
(Nanda Rajjat 2021)
संजय चौहान
रोपणी के खेत से जीतू को हर ले गयी आंछरियां
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
उत्तराखण्ड के पीपलकोटी में रहने वाले संजय चौहान पत्रकार है. संजय उत्तराखण्ड के विभिन्न मुद्दों पर सारगर्भित लेखन के लिए जाने जाते हैं. यह लेख संजय की फेसबुक वाल से साभार लिया गया है.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पिछली कड़ी : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट…
पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले…
तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक…
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में जब कोई आगंतुक किसी…
नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश…
उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल…