परम्परा

कोटगाड़ी भगवती मंदिर की तस्वीरें

कामनापूर्ति मैया कोटगाड़ी भगवती का मंदिर थल कोटमन्या रोड पर स्थित पांखू के पास स्थित है. कोटगाड़ी मंदिर में भगवती सात्विक वैष्णवी रूप में पूजी जाती है. न्याय की देवी अधिष्ठात्री के रूप में प्रतिष्ठित है कोटगाड़ी भगवती मां. कुमाऊं के अन्य कई न्यायकारी मंदिरों की भांति यहां भक्त अपनी आपदा-विपदा, अन्याय, असमय कष्ट व कपट के निवारण के लिये पुकार लगाते हैं मनौती मांगते हैं और न्याय की कामना करते हैं. 
(Kotgari Devi Mandir Photos)

कोटगाड़ी देवी के मुख्य सेवक भंडारी ग्वल्ल हैं. चैत्र व अश्विन मास की अष्टमी को तथा भादों में ऋषि पंचमी को मंदिर में मेला लगता है. लोक विश्वास है कि भगवती-वैष्णवी के दरबार में पांचवीं पुश्तों तक का भी निर्णय-न्याय मिलता है. मां के सात्विक वैष्णवी स्वरूप को खीर व प्रसादों का भोग लगता है. मनोकामना पूर्ण होने एवं नवरात्रियों में अठवार व बलि मंदिर से चौथाई किमी आगे ग्वल और भैरव के थान पर सम्पन्न होती रही है.
(Kotgari Devi Mandir Photos)

फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे
फोटो: प्रो. मृगेश पाण्डे

प्रोफेसर मृगेश पाण्डे

जीवन भर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुल महाविद्यालयों में अर्थशास्त्र की प्राध्यापकी करते रहे प्रोफेसर मृगेश पाण्डे फिलहाल सेवानिवृत्ति के उपरान्त हल्द्वानी में रहते हैं. अर्थशास्त्र के अतिरिक्त फोटोग्राफी, साहसिक पर्यटन, भाषा-साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, इतिहास और लोक पर विषदअधिकार रखने वाले मृगेश पाण्डे काफल ट्री के लिए नियमित लेखन करेंगे.

आसमां छूते पहाड़ों के बीच सुसाट-भुभाट के साथ बलखाती काली और उसके रहस्य
(Kotgari Devi Mandir Photos)

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