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कपिल देव के 175 नॉट आउट की एक स्मृति

सभी संभावनाओं को दरकिनार कर पिछली दो बार की विश्व चैम्पियन टीम वेस्ट इंडीज को पहले लीग में और फिर फाइनल में अप्रत्याशित रूप से हरा कर 1983 का विश्वकप भारत ने जीता था. मुझे नहीं लगता कि भारत में किसी भी अन्य स्पोर्ट्स घटना के बारे में इतना लिखा-कहा-सुना गया है जितना इस विश्वकप के बारे में. (Kapil Dev Magical Innings)

वर्ल्ड कप 1983 की भारतीय टीम

आज उस विश्वविजेता भारतीय टीम के कम्पोजीशन पर निगाह डालें तो लगता है कि वह वन डे क्रिकेट के लिहाज से हमारी आज तक की सबसे अच्छी टीम थी. टीम में दुनिया के सबसे अच्छे आलराउंडर माने जाने वाले कप्तान कपिल देव के साथ के आलराउंडरों का एक पूरा जत्था शामिल था. इनमें मदन लाल, मोहिंदर अमरनाथ, रोजर बिन्नी, रवि शास्त्री, कीर्ति आजाद शामिल थे. बल्लेबाजी की कमान सुनील गावस्कर, श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, संदीप पाटिल, दिलीप वेंगसरकर और यशपाल शर्मा के पास थी. किरमानी जैसा विकेटकीपर था और बलविंदर संधू जैसा स्विंग गेंदबाज.

इतनी बेहतरीन टीम होने के बावजूद सच यह था कि भारत की टीम को टूर्नामेंट की सबसे कमज़ोर टीमों में से एक आंका जाता था.(Kapil Dev Magical Innings)

इस विश्वकप के फाइनल से पहले हुए एक लीग मैच में भारत का मुकाबला जिम्बाब्वे से था, अगले चरण में पहुँचने के लिए भारत का जिसे जीता जाना आवश्यक था.

विश्वकप के साथ कपिल और मोहिंदर

मैं तब नैनीताल के एक आवासीय स्कूल में पढ़ा करता था. हमारी क्लासेज 3:25 तक चलती थीं. यही समय था जब बीबीसी में वर्ल्ड कप के मैचों की कमेंट्री शुरू होती थी. पहले हमें सीधे क्लास से भाग कर अपने हॉस्टल पहुंचना होता था जहाँ पहुँच कर लॉकर रूम में जाकर स्पोर्ट्स ड्रेस पहननी होती थी और 3:45 तक खेल मैदान में हाजिरी के लिए मौजूद होना होता था. अनुशासन की स्थिति बहुत कर्री थी और देर से पहुँचने की सूरत में सजा मिलती थी. तो क्लास के ख़त्म होने से खेल मैदान पहुँचने के बीच के इस बेहद व्यस्त अंतराल में किसी तरह समय निकालकर लॉकर रूम में एक सहपाठी द्वारा अवैध रूप से छिपाए गए ट्रांजिस्टर में छिप कर मैच की शुरुआती गेंदों के बारे में सुनने का समय भी निकालना पड़ता था.

क्रिकेट इतिहास का सबसे घटिया फैसला और 45 आल आउट

मुझे अच्छी तरह याद है जब ट्रांजिस्टर रेडियो को ऑन किया गया तो कमेंटेटर की आवाज कहीं दूर से आती सुनाई पड़ी. ऐसा लग रहा था कि वह किसी द्वीप से कमेंट्री कर रहा हो. चार या पांच विकेट गिर जाने और दस या पंद्रह रन बन जाने जैसा कुछ सुदूर सुनाई तो दिया लेकिन हमें लगा कि या तो मैच शुरू नहीं हुआ है या बीबीसी के सिग्नल खराब हैं. हमें उम्मीद थी कि अक्सर अच्छी टीमों से हार जाने वाली हमारी टीम ज़िम्बाब्वे जैसी नौसिखिया टीम के खिलाफ ढेर सारे रन बनाएगी और हमारी आत्माओं को तृप्त करेगी.

इसके बाद बिना ज्यादा बात करे हम लोग खेल के मैदान की तरफ चले गए. 4:45 पर खेल का घंटा ख़त्म होता था हिसके बाद हमें चाय-बिस्कुट के लिए डाइनिंग हॉल जाना होता था. क्रिकेट के लती हम चार या पांच दोस्त चाय-बिस्कुट का लालच छोड़ सीधा लॉकर रूम में पहुंचे और ट्रांजिस्टर खोला.

किंग रिचर्ड्स और बिग बर्ड का था 1979 का विश्वकप

तब तक उस जादू का घटना शुरू हो गया था जिसे आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा चमत्कारिक प्रदर्शन माना जाता है. उस समय कपिल देव और रोजर बिन्नी खेल रहे थे और टीम का स्कोर 70 के आसपास था. बाद में पता चला कि भारत के 4 विकेट 9 रन के स्कोर पर गिर चुके थे और 17 रन पर पांचवां विकेट जा चुका था. तब से ये दोनों खेल रहे थे.

5:45 पर हमारी शाम की पढाई यानी प्रेप शुरू होती थी जिसे हॉस्टल में ही एक अध्यापक की देखरेख में किया जाना होता था. हमारी खुशकिस्मती थी कि उस दिन जिन अध्यापक की प्रेप-ड्यूटी लगी वे खेलों के परम भक्त थे. जाहिर है उन्हें भी पता था कि विश्व कप में क्या चल रहा है. प्रेप शुरू होने तक कपिल देव आउट नहीं हुआ था और मदन लाल के साथ खेल रहा था. भारत के 7 विकेट जा चुके थे. पूरी प्रेप भर हम बच्चों ने पढ़ाई नहीं की और प्रेप-मास्टर के साथ लम्बी सी मेज पर बैठ कर वार्डन के कमरे से लाये गए रेडियो पर कमेंट्री सुनी.

बयालीस साल के प्रभु नाना और ग्लेन टर्नर की वह रेकॉर्ड पारी

कपिल देव ने 16 चौके और 6 छक्के मार कर अकेले 175 रनों का अम्बार लगा दिया था. टीम के 78 पर 7 हो गए थे लेकिन कपिल देव के मदन लाल और किरमानी जैसे पुछल्लों के साथ खेलते हुए टीम का स्कोर 266 पहुंचा दिया था. ध्यान रहे वे जब खेलने आये थे टीम का स्कोर था 4 विकेट पर 9 रन. जाहिर है भारत ने मैच जीता और अगले चरण में पहुँचने का रास्ता साफ़ कर लिया और उसके बाद जो घटा वह अब इतिहास बन चुका है. (Kapil Dev Magical Innings)

यह एक कल्पनातीत घटना थी जिसके घटने की हम सपने में ही उम्मीद कर सकते हैं. टनब्रिज वेल्स के नेविल ग्राउंड पर जिस दिन कपिल देव ने यह करिश्मा किया था, बदकिस्मती से कुछ कानूनी विवादों के चलते उस मैच की वीडियो रेकॉर्डिंग न हो सकी. यह अलग बात है कि उनके एक एक शॉट की रेकॉर्डिंग मुझ जैसे लाखों-करोड़ों लोगों के दिलों और स्मृतियों में सुरक्षित है जिन्होंने उस दिन कमेंट्री सुनी थी.

कपिल देव की इस पारी ने 1975 ke पहले विश्वकप में न्यूजीलैंड के ग्लेन टर्नर के 171 के रेकॉर्ड को ध्वस्त कर दुनिया के किसी भी देश में किसी भी खिलाड़ी द्वारा खेली गयी वनडे क्रिकेट की सबसे बड़ी पारी का नया कीर्तिमान स्थापित किया था.

तब वर्ल्ड कप क्रिकेट को किसी ने सीरियसली नहीं लिया था

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