Featured

एक फायर के तीन शिकार कुली, मुर्गी और ‘अल्मोड़ा अख़बार’

एक फायर के तीन शिकार
कुली, मुर्गी और ‘अल्मोड़ा अख़बार’

यह टिप्पणी गढ़वाल समाचार पत्र की है. गढ़वाल समाचार पत्र ने यह टिप्पणी तब की थी जब ब्रिटिश सरकार ने अल्मोड़ा अखबार को बंद करवा दिया था.

दरसल हुआ कुछ यूं था कि इन दिनों अल्मोड़ा अखबार का संपादन बदरीदत्त पांडे के हाथों में था. अल्मोड़े का जिलाधिकारी लोमस हुआ करता था. एक दिन जिलाधिकारी लोमस अल्मोड़े के स्याहीदेवी के जंगलों में एक सुंदरी के बाह पास में फंसा रंगरलियां मना रहा था.

कुमाऊं में इन दिनों भी कुली बेगार का प्रचलन था. लोमस ने एक कुली से शराब मंगाई. किसी कारणवश कुली को शराब लाने में कुछ देर हो गयी. घमंडी लोमस ने आव देखा न ताव और कुली पर गोली चला दी. जिससे कुली घायल हो गया.

अल्मोड़ा अखबार के संपादक बद्रीदत्त पांडे ने इस ख़बर को छापकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दे दी. अल्मोड़ा अख़बार अब तक देशभर में लोकप्रिय हो चुका था इसलिए ख़बर के छपते ही देशभर में लोमस की थू-थू होने लगी.

लोमस ने अपने बचाव में एक बयान जारी किया और कहा कि मैं जंगल में मुर्गी पर फायर कर रहा था गलती से कुली पर गोली लग गयी. बद्रीदत्त पांडे यहीं कहाँ चुप रहने वाले थे उन्होंने लोमस के जवाब पर प्रश्न पूछा कि

अप्रैल के माह में तो जंगलों में शिकार खेलने पर प्रतिबंध होता है फिर लोमस कैसे जंगल में शिकार खेल सकता है.

अल्मोड़ा अख़बार के इस सवाल पर ब्रिटिश सरकार और शर्मसार हो गयी सो उसने तत्कालीन संचालकों पर दबाव बनाकर अल्मोड़ा अखबार ही बंद करा दिया और तब गढ़वाल समाचार पत्र ने यह टिप्पणी छापी थी.

1870 में अल्मोड़े में शिक्षित और जागरुक लोगों ने एक क्लब की स्थापना की नाम था डिबेटिंग क्लब. डिबेटिंग क्लब का संरक्षक चंदवंशीय राजा भीम सिंह को चुना गया था. डिबेटिंग क्लब की स्थापना के बाद प्रांतीय गर्वनर, जिसे स्थानीय भाषा में लाट कहा जाता था, सर विलियम अल्मोड़ा नगर में आये.

बुद्धि वल्लभ पन्त ने गवर्नर विलियम को डिबेटिंग क्लब में बुलाया और अल्मोड़ा अखबार के प्रकाशन की योजना के विषय में बताया. लाट विलियम से परामर्श से प्रिंटिंग प्रेस की व्यवस्था की गयी. 1871 में ‘अल्मोड़ा अखबार’ का प्रकाशन प्रारंभ किया गया. इसके पहले संपादक हुए बुद्धि वल्लभ पन्त.

बुद्धि वल्लभ पन्त के बाद मुंशी इम्तियाज अली, जीवन चंद्र जोशी, सदानंद सनवाल, विष्णुदत्त जोशी आदि अल्मोड़ा अखबार के संपादक हुए. शुरुआत में यह साप्ताहिक. मासिक और पाक्षिक रूप में निकला करता था लेकिन जब 1913 में बद्रीदत्त पांडे ने संपादक का पड़ संभाला तो उन्होंने इसका साप्ताहिक रूप निश्चित कर दिया. अल्मोड़ा अखबार को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का श्रेय भी बद्रीदत्त पांडे को जाता है. अल्मोड़ा अख़बार पर प्रतिबंध लगने के बाद ही बद्रीदत्त पांडे ने शक्ति का प्रकाशन प्रारंभ किया.

अल्मोड़ा अखबार की कीमत शुरुआत में अमीरों, सोसाइटियों, जनमानस और विद्यार्थियों के लिये अलग-अलग थी. अल्मोड़ा अखबार सबसे महंगा अमीरों के लिये था और सबसे सस्ता विद्यार्थियों के लिये.

सौ साल पहले हिंदी के समाचार पत्रों में किस तरह लिखा जाता था एक नजर देखिये :

बातों ही बातों में उन मेघों का पता नहीं रहा जो चार मास हमारे परम मित्र व दिन रात के साथी बने रहे, कभी मान रूप से चुपचाप छाये रहे, कभी दान रूप से धरती को भरते रहे, कभी दण्ड रूप से गरज-गरज कर व झड़क कर धमकियां देते रहे.

वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

पुरवासी के 2003 के अंक में छपे शिरीष पाण्डेय के लेख के आधार पर.

काफल ट्री डेस्क

1842 से छप रहे हैं उत्तराखण्ड में अखबार

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

धरती की 26 सेकंड वाली धड़कन: लोककथा और विज्ञान का अद्भुत संगम

दुनिया के अनेक लोक कथाओं में ऐसा जिक्र तो आता है कि धरती जीवित है,…

5 months ago

कथा दो नंदों की

उपकोशा की चतुराई, धैर्य और विवेक से भरी कथा के बाद अब कथा एक नए…

5 months ago

इस बदलते मौसम में दो पहाड़ी रेसिपी

पहाड़ों में मौसम का बदलना जीवन की गति को भी बदल देता है. सर्दियों की…

5 months ago

अल्मोड़े की लखौरी मिर्च

उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक संपदा, पारंपरिक खेती और लोक संस्कृति के लिए जाना जाता है. पहाड़…

5 months ago

एक गुरु की मूर्खता

केरल की मिट्टी में कुछ तो है, या शायद वहाँ की हवा में, जो मलयालियों…

5 months ago

अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं तो जरूर पढ़ें एकलव्य प्रकाशन की किताबें

अगर आपके घर में बढ़ते बच्चे हैं, तो उनके भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी केवल…

5 months ago