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नियम से चलते तो पिथौरागढ़ में कूड़े की समस्या होती ही नहीं

पिछले दो दशकों से पिथौरागढ़ के लोग नगर के आसमान पर उड़ता हुआ हवाई जहाज देख पाने की उम्मीद लगाये बैठे हैं. जहाज तो कभी दिखा नहीं लेकिन पिछले कुछ सालों में नैनीपातल से बनने वाला धुँआ पिथौरागढ़ के आसमान में खूब दिखा है. धुँआ भी साल दर साल काला होता जा रहा है. पिथौरागढ़ की राजनीति में कुछ लोगों ने तो इसी धुँए को जहाज के आने से पहले आने वाला धुँआ बताकर वोट भी खींच लिये हैं. फ़िलहाल नैनीपातल के धुँए से पिथौरागढ़ बाजार में खबर गरम है कि सरकार नैनी-सैनी से हवाई जहाज न उड़ने का अगला कारण इसी धुँए को बताने वाली है.

पिछले सात दिनों से पिथौरागढ़ जिले में नैनीपातल के पास मौजूद ट्रंचिंग ग्राउंड में आग लगी है. आग कितनी भीषण है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले शनिवार को नगर से लगभग दस किमी की दूरी पर स्थित नगर मुख्यालय पिथौरागढ़ तक नैनीपातल के ट्रंचिंग ग्राउंड का धुँआ पहुंच गया. आग लगने के पहले 36 घंटों में आग बुझाने के लिए नगर पालिका की ओर से यह दावा किया गया कि आग बुझाने के लिये वह आठ हजार लीटर पानी और नौ टिप्पर मिट्टी का छिड़काव कर चुकी है. इसके बाद दावा किया गया कि 60 प्रतिशत आग पर काबू पा लिया गया है. लेकिन हकीकत में आग बढ़ती चली गयी.

रविवार को बीसाबजेड़, भौड़ी, नाघर, नैनीपातल, मझेड़ा, सातसिलिंग, सल्मोड़ा, सुखपोखरी आदि गांवों के प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड पर पहुंचे. उन्होंने पिथौरागढ़ शहर से कूड़ा लेकर गए पालिका के 10 वाहनों को स्थानीय गांव वालों की मदद से भगा दिया. इसके बाद नगरपालिका अध्यक्ष राजू रावत, एडीएम आरडी पालीवाल, ईओ दीपक कुमार को स्वयं उक्त स्थल में आना पड़ा. रविवार के दिन ही आईटीबीपी के जवानों और पिथौरागढ़ फायर ब्रिगेड ने सयुंक्त रूप से आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन सात दिन बाद तक भी आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया गया था.

ऐसा पहली बार नहीं है जब नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड में आग लगी है और इसका नुकसान आस-पास के गांव में रहने वालों को भुगतना पड़ रहा हो. आग के दौरान आप बिना मास्क के नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड के पास से गुजर कर देखिये आपको अपनी नाक और कान के भीतर काली परत जमी हुई मिलेगी और गले में खरास आप महसूस कर सकते हैं फिर इसके आस-पास के गांव के लोग कैसे यहाँ रहते होंगे? पिछले कुछ सालों की नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड की भयावह तस्वीरें देखिये.

नैनीपातल 2015

नैनीपातल 2016

नैनीपातल 2018

पिछले चालीस सालों से पिथौरागढ़ नगर का कचरा नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड में इकठ्ठा किया जा रहा है. आज के दिन हर दिन 28 टन कूड़ा नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड में डम्प किया जाता है. हाईकोट के आदेश के बावजूद मार्च 2018 तक नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड में किसी तरह के कम्पोसीट नहीं बनाये गये थे.

मार्च 2018 में होलियों के दौरान पिथौरागढ़ के एक युवा नकुल चंद ने नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड में लगी आग का एक वीडियो फेसबुक में डाला. यह वीडियो पिथौरागढ़ के युवाओं के बीच वायरल हो गया. पिथौरागढ़ के ही एक युवा हितेश भट्ट ने नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड को लेकर एक अपील नैनीताल हाईकोर्ट में डाली. इसके साथ ही हितेश ने www.change.org के माध्यम से एक आनलाईन पिटीशन भी लगाई जिसे पिथौरागढ़ के हजार से ज्यादा युवाओं ने साइन किया. नैनीताल हाईकोर्ट ने जिला सत्र न्यायालय के माध्यम से पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी को निर्देश दिये. इस संबंध में जिलाधिकारी ने संबंधित वादियों पर केस भी दर्ज कराया. उसी का नतीजा है कि आज आप नैनीपातल ट्रंचिंग ग्राउंड पर कुछ एक कम्पोसिट बने देख सकते हैं. हाल में हुये पिथौरागढ़ नगरपालिका चुनाव में वेस्ट मैनेजमेंट एक बड़ा मुद्दा था. हालांकि अब सारी बातें ठंडे बस्ते में हैं.

हितेश भट्ट को पिथौरागढ़ जिलाधिकारी का पत्र

नैनीपातल पिथौरागढ़ से दस किलोमीटर की दूरी पर कनालीछीना रोड पर स्थित एक बेहद खूबसूरत जगह का नाम है. एक समय था जब पिथौरागढ़ में जिनके पास नये साल में या गर्मियों की छुट्टी में नैनीताल घूमने जाने को समय और पैसा नहीं होते थे वो नैनीपातल का रुख करते थे. पिथौरागढ़ जिले में कहा जाता था नैनीताल ना सही नैनीपातल ही घूम लिया जाय. आज यहां पिथौरागढ़ नगरपालिका हर तरह का जैविक अजैविक और कैमिकल कूड़ा एक साथ फेंकती है जिसे चुपके से समय-समय पर जला भी दिया जाता है.

पिछले कई सालों से पिथौरागढ़ नगरपालिका न केवल ढेर सारे अधिनियमों का उल्लंघन कर रही है बल्कि धड़ल्ले से उसका मखौल भी उड़ा रही है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एवं बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, 2016 प्रणाली के तहत पालिका द्वारा जैविक-अजैविक कचरे का अलग-अलग निस्तांतरण अनिवार्य है साथ ही खुले में कूड़ा जलाना भी पूर्णतः प्रतिबंधित है. इसके बावजूद मार्च 2018 तक जैविक-अजैविक कचरे के निस्तारण के लिये कोई प्रबंध किया गया था.

कूड़ा निस्तारण की यह समस्या केवल पिथौरागढ़ की है ऐसा नहीं है. आप उत्तराखण्ड की कथित राजधानी देहरादून से लेकर कोई भी जिला ले लीजिये कूड़े का निस्तारण हर जिले की समस्या है फिर चाहे वह सरोवर नगरी नैनीताल हो, पुण्यनगरी हरिद्वार हो. हर नगर जो बड़ा हो रहा है वहां कूड़ा निस्तारण एक समस्या है. दिल्ली जैसे शहर में यह राष्ट्रीय खबर बन जाता है लेकिन उत्तराखण्ड में इस तरह की ख़बर को शायद ही कोई जगह मिलती है.

अगर पिथौरागढ़ नगर के उदाहरण को लेकर देखें तो यह नगर अकेले एक दिन में 28 टन कूड़ा जमा कर लेता है. पिथौरागढ़ का नैनीपातल उत्तराखण्ड के हर उभरते कस्बे का एक प्रतीक है. उत्तराखण्ड के हर उभरते कस्बे में एक नैनीपातल तैयार हो रहा है. क्या इतना मुश्किल है कूड़ा मैनेज करना.

जरुरत किसी नये नियम की नहीं है. यदि पालिकाएं पहले से बने नियमों का पालन ही कायदे से करें तो कूड़ा समस्या बन ही नहीं सकती. जैसे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एवं बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, 2016 के तहत हर कस्बे में जैविक और अजैविक कूड़े को अलग अलग इकट्ठा किया जाये तो दोनों का उपयोग भी किया जा सकता है. दूसरी बात एक कामनसेंस की बात है कि अगर एक ही जगह पर सालों कूड़ा डाला जायेगा तो जगह प्रदूषित होगी ही होगी. अगर शहरों में तीन से चार अलग अलग ट्रंचिंग ग्राउंड बनाये जायें जिनमें रोटेशन के आधार पर पूरे साल केवल कूड़ा डाला जाय तो कूड़ा कभी समस्या बनेगा ही नहीं. इस पर बात आती है भूमि की. यदि सरकार खनन के लिये वन भूमि बेच सकती है. सरकारी शराब के ठेकों के लिये जमीन का दिला सकती है तो सरकार के लिये ट्रंचिंग ग्राउंड के लिये जमीन अधिकरण कौन सी बड़ी बात है.

सरकार को विभागों के बीच सामंजस्य बैठाकर चलाया जाना चाहिये. खैर पिथौरागढ़ की राजनीति में नैनी-सैनी और नैनीपातल कभी न सुलझने वाले मुद्दों में हैं. राज्य बनने के बाद से दोनों समस्याओं का कारण पिछली सरकार है. जैसे पिछले सात दिनों से लगी आग पर पिथौरागढ़ नगरपालिका अध्यक्ष ने बताया कि पिछले नगरपालिका अध्यक्ष ने अगर पहल की होती तो आज पिथौरागढ़ में एक रिसाईकल सेंटर मौजूद होता.

काफल ट्री डेस्क

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Girish Lohani

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