Featured

उत्तराखंड में गंगा मैय्या का सफर

भागीरथी का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर है. भागीरथी देवप्रयाग में अलकनंदा ने मिलकर गंगा कहलाती है.

गोमुख से कुछ दूरी पर चलने के बाद भागीरथी में चिरबासा पर्वत से आने वाली एक जलधारा मिलती है. इसके बाद भागीरथी गंगोत्री पहुंचती है जहां इसके तट पर गंगा का प्राचीन मंदिर स्थित है.

गंगोत्री से कुछ दूरी पर केदारगंगा भागीरथी से मिलती है. जिसके बाद भागीरथी भैंरोघाटी में उतरती है. भैंरोघाटी के नीचे भागीरथी से जाह्नवी नदी मिलती है. इसके बाद थराली से होते हुए भागीरथी हर्सिल घाटी में आती है.

हर्सिल घाटी में काकरी गाड़ और जालंधरी गाड़ भागीरथी से मिलती हैं. पुराली के पास सियान जलधारा और सुनागर के पास मेहाधार से आ रही फेनिल जलधाराएं भागीरथी से मिलती हैं.

फोटो http://uttaraexam.blogspot.com से साभार

भटवाड़ी के पास नवला नाम की नदी भागीरथी से मिलती है. माला के पास द्रौपदी शिवर से निकलने वाली जलधारा भागीरथी से मिलती हैं. इसके बाद मनेरी की सुरंग होते हुए भागीरथी के जल को तिलोथ पावर हाउस उत्तरकाशी में पहुंचाया जाता है.

उत्तरकाशी में भागीरथी के उपरी हिस्से में अस्सी गंगा और निचले हिस्से में वरुण गंगा मिलती है. उत्तरकाशी के ठीक नीचे भगीरथी के पानी को भूमिगत सुरंगों के सहारे मनेरी-भाली स्टेज-दो जलविद्युत गृह के लिये धरासू पहुंचाया जाता है. धरासू में दहशीलगाड़ भागीरथी से मिलती है.

धरासू से चिन्यालीसौंड़, नगुण, छाम, भल्डियाना होकर भागीरथी गणेश प्रयाग पहुंचती है. जहाँ इससे भिलंगना नदी मिलती है. गणेश प्रयाग या पुरानी टिहरी का पौराणिक नाम धनुष तीर्थ है. यह शहर 6 दिसम्बर 2001 को जलसमाधि ले चुका है. टिहरी बांध इसी संगम पर स्थित है. टिहरी बांध बनने से अब यह संगम नहीं दिखायी देता है.

टिहरी बांध के बाद भागीरथी पर कोटेश्वर गांव के पास कोटेश्वर बाँध बना है. इसके बाद भागीरथी देवप्रयाग में पहुंचती है जहां अलकनंदा उससे मिलती है.

अलकनंदा संतोपथ ग्लेशियर से निकलती है. अलकनंदा से मिलने वाली उसकी पहली सहायक नदी सरस्वती है. सरस्वती से मिलने के बाद यह बदरीनाथ धाम के सामने से होते हुये बहती है.

इसके बाद गोविन्दघाट के पास अलकनंदा से लक्ष्मण गंगा आकर मिलती है. बद्रीनाथ धाम और गोविन्दघाट की बीच में हनुमानचट्टी मंदिर भी स्थित है.

विष्णुप्रयाग में पश्चिमी धौलीगंगा अलकनंदा से मिलती है. नंदप्रयाग में नन्दाकिनी, अलकनंदा से मिलती है. नन्दाकिनी, त्रिशूल पर्वत के पास नन्दाघुंघटी से निकलती है.

इसके बाद कर्णप्रयाग में अलकनंदा से पिंडर नदी मिलती है. पिंडर बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर से निकलती है. पिंडर की एक मुख्य सहायक नदी आटागाड़ है.

मंदाकिनी और अलकनंदा का संगम रुद्रप्रयाग में होता है. मंदाकिनी, अलकनंदा की एकमात्र सहायक नदी है जो दाएं ओर से उसमें मिलती है. मन्दाकिनी केदारनाथ की मंदरांचल श्रेणी से निकलती है. वासुकी या सोनगंगा और मधुगंगा मन्दाकिनी की प्रमुख सहायक नदियां हैं. सोनगंगा और मंदाकिनी के संगम पर ही सोनप्रयाग स्थित है.

देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी संयुक्त रूप से गंगा के नाम से जानी जाती हैं. यहां से गंगा व्यास घाटी पहुंचती है. व्यास घाटी में न्यार नदी गंगा से मिलती है. जिसके बाद ऋषिकेश में चन्द्रभागा नदी गंगा से मिलती है.

हरिद्वार पहुँचने से पहले देहरादून से आने वाली सौंग नदी गंगा से आकर मिलती है. हरिद्वार में भीमगोड़ा बैराज से होते हुए गंगा की एक धारा हरकी पैड़ी की आती है दूसरी धारा पूर्वी गंगा नहर के नाम से हरिद्वार सहित उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की कृषि भूमि की सिंचाई के लिये निकाली गई है.

शेष जलराशि जिसे नीलधारा भी कहा जाता है गंगा का मुख्य प्रवाह क्षेत्र है. यहां से गंगा दक्षिण की ओर बहती हुई उत्तराखंड की सीमा छोड़कर उत्तरप्रदेश की ओर बढ़ जाती है.

– काफल ट्री डेस्क

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

View Comments

  • आपने गंगा के उद्गम से लेकंर हरिद्वार तक उसमें बीसिओं छोटी बड़ी नदियोंं के आ मिलने और उसके पौराणिक महत्त्व के गमनपथ का अद्भुत वर्णन प्रस्तुत किया। साधुवाद स्वीकार करें।

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago