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नारी निकेतन की लचर व्यवस्थाओं से राज्यपाल नाराज

राज्‍यपाल बेबी रानी मौर्य सोमवार को देहरादून के नारी निकेतन का औचक निरीक्षण किया. नारी निकेतन की हालत पर राज्‍यपाल ने नाराजगी जताई. उन्होंने जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन और सीएमओ एसके गुप्‍ता को आदेश दिए कि हर माह उन्‍हें नारी निकेतन की व्‍यवस्‍थाओं पर रिपोर्ट दी जाए. जन्माष्टमी के पावन पर्व पर उन्होंने नारी निकेतन की संवासिनियों को फल एवं मिष्ठान भेंट किया. नारी निकेतन की कई संवासिनियों का स्वास्थ्य खराब होने की खबर का संज्ञान लिया.

राज्यपाल ने सी़एम़ओ को नारी निकेतन की किचन और खाद्य सामाग्री की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश भी दिए. उन्होंने स्वयं वहां बनाये जा रहे भोजन को चख कर भी देखा. सी़एम़ओ ने बताया कि वर्तमान में 04 संवासिनियां दून अस्पताल में भर्ती हैं. इसके अलावा अधिकारियों को भविष्य में संवासिनियों की देखरेख और सुविधाओं में किसी तरह की लापरवाही नहीं होने की हिदायत दी है.

गौरतलब है कि संवासिनी के साथ दुष्कर्म, गर्भपात की घटना हो या फिर शिशु निकेतन में दो बच्चों की मौत का मामला, हमेशा ही नारी निकेतन की व्यवस्थाएं कटघरे में खडी करती रहीं है. हैरत की बात ये है कि एक के बाद एक व्यवस्थाओं पर उठते सवालों के बावजूद शासन या सरकार अति संवदेनशील नारी निकेतन की व्यवस्थाओं को सुधारने में नाकाम साबित हुआ है.

आरोप है कि वर्ष 2015 नवंबर में नारी निकेतन में रहने वाली मूक बधिर संवासिनी के साथ वहीं के स्टॉफ ने दुष्कर्म किया और फिर चुपचाप संवासिनी का गर्भपात करा दिया. इसके बाद इस घिनौने अपराध को छिपाने के लिए नारी निकेतन के स्टॉफ से लेकर पूरा विभाग जुट गया. अव्यवस्थाएं यहीं खत्म नहीं हुई इसके कुछ दिन बाद सामान्य संवासिनियों ने घर जाने की जिद को लेकर नारी निकेतन में हंगामा और तोडफोड कर दी थी. हालांकि इस मामले की गंभीरता को समझते हुए खुद समाज कल्याण मंत्री ने बालिका निकेतन का निरीक्षण करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, बावजूद इसके कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए .

विगत दिनों बाल एवं महिला विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य के कुछ हफ्ते पूर्व हुए निरीक्षण में भी यह बात सामने आई थी कि नारी निकेतन में संवासिनियों को रहने के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. मनोरोग विशेषज्ञ भी नहीं नारी निकेतन में मानसिक रूप से कमजोर संवासिनियां भी रहती हैं. इनकी मानसिक स्थिति सही नहीं रहती. इसके लिए यहां मनोरोग विशेषज्ञ की भी जरूरत है. औचक निरिक्षण के बाद डीएम को नारी निकेतन व अन्य बाल गृहों में खाने-पीने, रहने, सुरक्षा समेत अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी को कहा गया है. राज्यपाल ने डीएम और सीएमओ को हर माह सीधे नारी निकेतन व अन्य बाल गृहों की रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए हैं.

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