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उठती है हर निगाह खरीदार की तरह

गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग-5 पिछली कड़ी- लोकतंत्र के पहरुवे जनतंत्र में जनगणमन की पूर्ण प्रतियोगिता से…

7 years ago

काली कुमाऊँ की झलक – जयमित्र सिंह बिष्ट के फोटो

  जयमित्र सिंह बिष्ट अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला…

7 years ago

वो दिनभर किराए की साइकिल चलाना और बतौर कप्तान वो फुटबॉल मैच में मेरा अविश्वसनीय गोल

पहाड़ और मेरा जीवन – 33 पिथौरागढ़ से राजस्थान जाने के बाद मैं एक साल वहां रहा. इस एक साल…

7 years ago

मासी का सोमनाथ मेला

सोमनाथ भगवान शंकर का पर्यायवाची नाम है. सोमनाथेश्वर नामक स्थान पर झाड़ियों के बीच एक गुफा के अन्दर शिवलिंग की…

7 years ago

लेखकों के सपने

मेरे द्वारा लिखे गये एक लेख के लिये सरकार मुझे गिरफ़्तार कर लेती है. मेरी गिरफ़्तारी से पूरे देश में…

7 years ago

अल्मोड़ा की एक शाम

"दुनिया की हर शहर की शाम को नोटिस किया जाना चाहिए" ऊपर लिखे इन ग्यारह शब्दों में कोई फलसफा नहीं…

7 years ago

पहाड़ सा बोझ उठाती पहाड़ी मां : स्व. कमल जोशी का फोटो निबंध

अपनी कविता में चंद्रकांत देवताले मां पर एक जगह लिखते हैं - मैंने धरती पर कविता लिखी है चंद्रमा को…

7 years ago

माँ होने का मतलब उस स्त्री से पूछना जो माँ नहीं होती

'माँ, महान होती है.' 'माँ, महान ही होती है.' हमारी सामाजिक व्यवस्था में ये दोनों वाक्य अधूरे हैं. इसका एक…

7 years ago

रूना लैला: क्वीन ऑफ़ बांग्ला पॉप

क्वीन ऑफ़ बांग्ला पॉप के नाम से मशहूर रूना लैला, बॉलीवुड में एक ताजा हवा के झोंके सी आईं. उनका…

7 years ago

अम्मा: आलोक श्रीवास्तव की कविता

अम्मा चिंतन दर्शन जीवन सर्जन रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा सूनापन तनहाई अम्मा उसने खुद़…

7 years ago