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बुकिल : एक आत्मकथा

मैं बुकिल हॅू, कुछ लोग मुझे बकौल भी बोलते हैं. वह बकौल नहीं, जो अरबी भाषा का शब्द होते हुए…

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पहाड़ों में पिछले एक महीने से खेतों में उत्सव का माहौल है

पहाड़ों में पिछले एक महीने से खेतों में उत्सव का माहौल है. बरसात अपने साथ ख़ुशियाँ भी लेकर आती है,…

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जी रया जागि रया यो दिन यो मास भेटने रया

लाग हरैला, लाग बग्वालीजी रया, जागि रयाअगास बराबर उच्च, धरती बराबर चौड है जयास्यावक जैसी बुद्धि, स्योंक जस प्राण है…

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कल हरेला है

पहाड़ियों के घर में आज हरेला तैयार हो चुका होगा. हरेला यानी पांच या सात प्रकार के अनाजों की हरी-पीली…

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चौमास में पहाड़

आजकल तो चौमास या बरसात के महिनों में एक डर बना रहता है कि कहां पहाड़ दरक जाये, कहां नदी…

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एक सुनहरे युग के आख़िरी बाशिंदे थे जिमी

क्रिकेट देखना मुझे तभी तक अच्छा लगता रहा जब उसे सफ़ेद पोशाक पहन कर खेले जाने का रिवाज था. फुटबाल…

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छिपलाकोट अंतरयात्रा: चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएँ

पिछली कड़ी : छिपलाकोट अन्तर्यात्रा : जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया वापसी का दौर था. कुंडल दा,…

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मखमली दुनिया के सफ़र में : फोटो निबंध

उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुन्दरता में चार चाँद लगाते हैं, यहाँ के उच्च हिमालय में स्थित दूर तक फैले हरे भरे…

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कुन्चा : रं (शौका) समुदाय की एक कथा

-प्रताप गर्ब्याल सूरज ने अपने सातों अश्वों को अस्तबल में बांध लिया है किन्तु उत्ताप अभी भी बरकरार है. सांझ…

2 years ago

पहाड़ के खेतों से पेरिस ओलम्पिक का सफ़र तय करने वाली अंकिता

उत्तराखंड के खेतों में अपने भाइयों संग प्रेक्टिस करने वाली अंकिता अब पेरिस ओलम्पिक में दिखेंगी. कभी गांव के खेतों…

2 years ago