"मैं उल्लू की आवाज़ को अशुभ नहीं मानता, फिर भी इस आवाज़ से अतीत और भविष्य की यादों में खो…
ताले में चाभी थोड़ी मुश्किल से घूमी. करीब दस महीने बाद मैं ‘अपने घर’ का तालाखोल रहा हूं. 2023 की…
उत्तराखण्ड के नैनीताल ज़िले का कैंची धाम हाल के वर्षों में आम लोगों के बीच एक बड़े आस्था और विश्वास…
स्वतंत्र फोटोग्राफर पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट स्व. कमल जोशी की फोटोग्राफी में पहाड़ का जीवन, दर्द वहां की परंपराएं और…
पहाड़ों में इसे दसार या दसौर भी कहते हैं. दसार या दसौर यानी गंगा दशहरा. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में…
हरिद्वार के हर की पैड़ी स्थित कुशा घाट में स्वतन्त्र लेखिका रही रीता खनका रौतेला का वार्षिक तिथि श्राद्ध उनकी…
तिब्बत में भोटान्तिकों का व्यापार वहां की अनेकानेक मंडियों में होता था. इनमें मुख्य तकलाकोट, ज्ञानिमा, गरतोक, चकरा, शिवचिलम, ख्युंग…
धरती मां ट्रस्ट ने द्वारा पर्यावरण संस्कृति उत्सव का आयोजन प्राथमिक विद्यालय ससबनी मुक्तेश्वर में किया गया. कार्यक्रम में सभी…
यह 2007 की बात है. दिन-वार ठीक से याद नहीं. अक्टूबर का महीना था. उन दिनों रामलीला(एं) चल रही थीं.…
पहाड़ में लड़के का परदेश जाना बेटी की विदाई से कम नहीं होता था. जो लोग हमारी उमर के हैं…