कॉलम

चटोरे जवाईं की लोककथा

मुझे अक्सर अपने दादा, दादी, चाचियाँ, माँ बहुत याद आते हैं. आप कहेंगे इसमें नई बात क्या है. अपनी जिंदगी…

7 years ago

मुठ्ठी भर कंचे

तब गाँव क्या था, श्याम-श्वेत सिनेमा के दौर का सा गाँव लगता था. चौतरफा खेत-ही-खेत थे, गन्ने-सरसों की फसलों से…

7 years ago

इतने विशाल हिंदी समाज में सिर्फ डेढ़ यार : दसवीं किस्त

हमारे ब्रह्माण्ड की पहली भारतीय कहानी ( एक विदेशी का लिखा हिन्दू लोक-मिथकों का इतिहास : 'क' ) सृष्टि के…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 21

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

7 years ago

बिजट मंदिर : एक फोटो निबंध

लगभग शाम का 6 बज गया था जब मैं हिमांचल प्रदेश में चूड़धार का ट्रेक करके बिजट महाराज के मंदिर…

7 years ago

अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 6

गुडी गुडी डेज़ अमित श्रीवास्तव बॉबी चचा के जज़्बात @ मौक़ा-ए-वारदात गुडी गुडी मुहल्ले में एक पुलिस थाना खुला और…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 20

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

7 years ago

कुमाऊँ में भैय्यादूज नहीं, दूतिया त्यार मनाया जाता है

मीडिया व बाजार धीरे-धीरे हमारी विभिन्न लोक व उसकी संस्कृतियों को निगलते जा रहे हैं. और यह इतने धीरे से…

7 years ago

कहो देबी, कथा कहो – 10

पिछली कड़ी सायोनारा...सायोनारा सिकंदराबाद स्टेशन पर मैंने एलिस से पूछा, “काफी पिएं?” वह बोली, “जरूर.” मैंने काफी मंगाई. हम बस…

7 years ago

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 19

पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से…

7 years ago