कला साहित्य

जिसे हँसने की तमीज नहीं वो भी जाए भीतर

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ - 4 अस्सी के दशक में समकालीन कविता में जिन महत्वपूर्ण कवियों ने पहचान बनायी…

8 years ago

वे मगहर में नहीं अपने घर में मर रहे हैं

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ - 3 अस्सी के दशक में समकालीन कविता में जिन महत्वपूर्ण कवियों ने पहचान बनायी…

8 years ago

एक दिन में नष्ट किया जा सकता है कोई भी पुस्तकालय

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ - 2 अस्सी के दशक में समकालीन कविता में जिन महत्वपूर्ण कवियों ने पहचान बनायी…

8 years ago

एक बुरूंश कहीं खिलता है

हरीश चन्द्र पाण्डे की कविताएँ - 1 एक बुरूंश कहीं खिलता है - हरीश चन्द्र पांडे खून को अपना रंग…

8 years ago

बारिश एक राह है स्त्री तक जाने की

बारिश -आलोक धन्वा बारिश एक राह है स्त्री तक जाने की बरसता हुआ पानी बहता है जीवित और मृत मनृष्यों…

8 years ago

आलोक धन्वा – जिसकी दुनिया रोज़ बनती है!

आलोक धन्वा - जिसकी दुनिया रोज़ बनती है -शिरीष मौर्य हर उस आदमी की एक नहीं कई प्रिय पुस्तकें होती…

8 years ago

प्रकट सुंदरता के भीतर कितने जलजले – आलोक धन्वा की कविता – 1

अपने भीतर घिरते जाने की कविताः आलोक धन्वा के बारे में -शिवप्रसाद जोशी अगर हिंदी कविता में इधर सबसे बेचैन…

8 years ago

कोयल उस ऋतु को बचा रही है

चेन्नई में कोयल -आलोक धन्वा चेन्नई में कोयल बोल रही है जबकि मई का महीना आया हुआ है समुद्र के…

8 years ago

भारतवासी होने का सौभाग्य तो आम से भी बनता है

आम के बाग़ -आलोक धन्वा आम के फले हुए पेड़ों के बाग़ में कब जाऊँगा? मुझे पता है कि अवध,…

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रामी बुढ़िया ( लोककथा )

एक गांव में रामी नाम की बुढिया रहती थी, उसकी बेटी का विवाह दूर एक गांव में हुआ था जहाँ…

8 years ago