समाज

स्वदेशी का प्रतीक ‘बागेश्वरी चरखा’ अब केवल इतिहास की बात रह चुका है

यह हिमालयी राज्यों का दुर्भाग्य रहा है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनके योगदान को उचित स्थान नहीं…

5 years ago

पहाड़ी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं ‘पहाड़ के फौजी’

हमारे पहाड़ की एक चीज ऐसी है जिसे पहाड़ी सस्कृति का ही एक अभिन्न अंग कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं…

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कुमाऊं की रामलीला का विस्तृत इतिहास

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई इलाकों में अनेक पर्व और…

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जिनके बिना अधूरा है पिथौरागढ़ में ‘टकाना की रामलीला’ इतिहास

टकाना रामलीला का प्रारम्भ से अब तक का सफर व मंचन बहुत ही सुन्दर, सराहनीय और लोकप्रिय रहा है. हमेशा…

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कुमाऊं की रामलीला पर ‘गिर्दा’ का एक महत्वपूर्ण लेख

कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः…

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दुश्मनों को धूल चटाने वाली बाबर की नानी ‘ईसान दौलत खानम’

बात 1470 के आस-पास की है, दश्त-ए-किप्चाक (तुर्किस्तान) में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही थी. हाल ही में दश्त-ए-किप्चाक ने अपना…

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सोर घाटी के बाशिंदों का सबसे पसंदीदा डॉक्टर

लंबी सधी हुयी ऊँगलियों के बीच चाईनीज इंक पेन से सादे सफेद पर्चे में मरीज को समझता और समझाता एक…

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सल्ट के हिनौला का प्राचीन इतिहास

ईजा का अपने मैत (मायके) से प्रेम होता ही है और मेरा मकोट (ननिहाल) से दो रुपये मिलने का लालच…

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पहाड़ों में नवरात्र के दिनों की यादें

सरादों के बाद नवरात्र शुरु हो जाते हैं. इन दिनों असोज का काम यानि फसल समेटने का काम कुछ कम…

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नैनीताल के डुट्याल व उनसे जुड़े रोचक किस्से

डुट्याव या डुट्याल शब्द जेहन में आते ही एक बेवकूफ, बेशऊर, बदनुमा से इन्सान का चित्र उभरता है- पसीने से…

5 years ago