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ढाई गुना फीस बढ़ाए जाने के विरोध में बैठे आयुर्वेदिक छात्रों के आन्दोलन पर शासन की बेरुखी

छात्र-छात्राओं के पेशेवर कोर्सेज की फीस जिस तरह लगातार बढ़ाई जा रही हैं उस से छात्र समुदाय में बहुत असंतोष है. यह असंतोष देश के तमाम हिस्सों में देखा जा रहा है. उत्तराखंड राज्य में आयुर्वेदिक औषधि की पढ़ाई कर रहे 13 प्राइवेट कॉलेजों के छात्र-छात्राएं पिछले चालीस दिन से देहरादून में धरने पर बैठे हुए हैं. (BAMS Students Uttarakhand Strike)

ज्ञातव्य है कि सरकार ने इन कॉलेजों में पढ़ाई की फीस सीधे-सीधे तीन गुना बढ़ा दी है. पहले यह फीस 80 हजार थी जिसे एकमुश्त बढ़ाकर लगभग सवा दो लाख कर दिया गया. इस के अतिरिक्त इन कॉलेजों में अनेक तरह के ‘हिडन चार्जेज’ जैसे डेवेलपमेंट फीस के नाम पर 30-40 हजार रुपये अलग से लिए जाते हैं. (BAMS Students Uttarakhand Strike)

इस फरमान के विरोध में जब राज्य सरकार ने छात्रों की गुहार नहीं सुनी तो उन्होंने कोर्ट में जाने का फैसला लिया था. इस के बड़ा हाईकोर्ट ने छात्रों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए फीस में की गयी उक्त वृद्धि को गलत बताया. लेकिन छात्रों का कहना है कि कॉलेज अब भी नई फीस लेने पर आमादा हैं.

इसी वजह से ये छात्र आन्दोलन की राह पर हैं. इनके आन्दोलन को दबाने के प्रयास अनेक स्तरों पर हो रहे हैं. शासन के अलावा इन बच्चों के कॉलेजों के प्रबंधन भी चाहते हैं कि इस आन्दोलन को समाप्त किया जाय और बच्चे नई फीस भरें और पढ़ाई करने वापस आएं.

राज्य कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी ने आज अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है: “चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी. अब इन्होने (सरकार ने) निर्दोष छात्रों को थाने में भी बंद करना शुरू कर दिया है. जिस प्रकार राज्य सरकार बीएएमएस के छात्रों के साथ सलूक कर रही है वो बहुत ही निंदनीय है. विगत 40 दिनों से अनशन पर बैठे छात्रों का जब आज सब्र का बांध टूटा और उन्होंने एक कदम आगे बढ़ उत्तराखंड राज्य मंत्री धन सिंह और सुबोध उनियाल को काले झंडे दिखाए तो उनसे ये सब बर्दाश्त नही हुआ. छात्रों की आवाज दबाने और उनके इस आंदोलन को कुचलने के प्रयास से आज उनपर मुकदमा भी करवा दिया. जहाँ एक और राज्य को लेकर बड़ी बड़ी बाते हो रही है वही राज्य के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.” (BAMS Students Uttarakhand Strike)

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