निगम, दमुवाढूँगा और सुअर

8 years ago

विकासशील देश पालने में लेटे-लेटे लम्बे अरसे तक अमेरिका आदि देशों को ताकते रहते हैं. फिर विकास की घुट्टी पीकर…

साझा कलम : फालतू पुराण

8 years ago

"आ गए अच्छे दिन? आज तो पलंग के नीचे से निकालकर ड्राइंग रूम तक आ गए, क्या बात है !"-…

नामवर सिंह के साथ समाप्त हो गयी दूसरी परंपरा की खोज

8 years ago

हिन्दी साहित्य के सम्पूर्ण इतिहास पर एक शानदार पुस्तक की जरुरत आज भी जस की तस है. एक नाम जो…

मुनस्यारी से मदकोट के रास्ते में पड़ने वाले एक स्कूल के बहाने

8 years ago

पिथौरागढ़ की मुनस्यारी (Munsyari) तहसील के सुदूर दरकोट नामक स्थान पर पिछले बाईस वर्षों से एक स्कूल चल रहा है.…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 119

8 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…

पिंटी का साबुन: संजय खाती की अविस्मरणीय कहानी

8 years ago

कथाकार संजय खाती का जन्म 1962 ई. में अल्मोड़ा में हुआ. कथा लेखन के साथ-साथ पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय हैं.…

मेले में अकेले

8 years ago

कहो देबी, कथा कहो – 35 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 34 उन्हीं दिनों एक लंबी यात्रा पिथौरागढ़…

हिसालू की जात बड़ी रिसालू

8 years ago

मई जून की गर्मियों में उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ों में कंटीली झाड़ियों के बीच उगने वाला एक रसदार फल होता…

वर्ल्ड म्यूजिक डे स्पेशल : ऋतुरैण गायन की विलुप्त होती परंपरा

8 years ago

उत्तराखण्ड (Uttarakhand)में ऋतु गीत गए जाने की परंपरा है, यह अब विलुप्त होती जा रही है. बसंत ऋतु में गाये…

कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 118

8 years ago

डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है - “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि…