अल्मोड़ा में लंबी कविता और पूरन पोली की मौज

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रात की पार्टी समाप्त होने के बाद अगले दिन मुहल्ले के हर कायाधारी के चेहरे पर अजीब सी खुशी के…

कुमाऊँ के फलों के कटोरे में चांद सा पुष्प बिखेर रहा रूहानी रौशनाई

7 years ago

भमोरा, कॉर्नस कैपिटाटा (Cornus Capitata) उत्तराखंड के कुमाऊँ  की पहाड़ियों में खिला अद्भुत फूल बहुत से प्राकृतिक रहस्यों को छुपाए…

हिमालय की सुन्दरतम चिड़ियों में एक है सेटर ट्रेगोपन : सुरेन्द्र पवार का फोटो निबंध

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कुमाऊँ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों के आसपास के जंगलों में देर शाम और सुबह एक बच्चे के रोने की आवाज…

कुमाऊँ में लकड़ी पर नक्काशी करने वाले आख़िरी उस्तादों में से एक धनीराम जी का इंटरव्यू

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अठहत्तर साल के धनीराम जी कुमाऊँ की गौरवशाली काष्ठकला परंपरा के आखिरी उस्ताद ध्वजवाहक हैं. उन्होंने आज से साठ बरस…

निमक का है हरामी यह खुदा भेजा क्यों हिन्दुस्तां

7 years ago

गढ़वाल शैली की चित्रकला के प्रवर्तक महान चित्रकार और कवि मौलाराम (1743-1833) की कला बहुत लम्बे समय तक जनता के…

86 साल की उम्र में बागवानी से स्वरोजगार का मॉडल खड़ा कर कायम की मिसाल

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पहाड़ में रोजगार को लेकर पलायन की कहानियां अक्सर सुनने को मिलती हैं. कभी पानी का न होना तो कभी…

पहाड़ियों की मेहनत के प्रतीक घास के लूटे

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बरसात के बाद मौसम में पहाड़ हरी लम्बी घास से लद जाते हैं. इस घास का प्रयोग यहां के लोग…

उस ज़माने के अफ़सर ऐसे हुआ करते थे : कुमाऊं कमिश्नर पर्सी विंडहैम का किस्सा

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वर्ष 1913 एक दिन, करीब 8 बजे जब मैं किच्छा में एक स्कूल का निरीक्षण कर रहा था, एक अध्यापक…

पचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक कंडवाल के साथ: प्रेमचंद और उनके बेटे की स्मृतियां

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अपनी जिंदगी के किसी पुराने टुकड़े को एकदम जीवंत रूप में देखना कितना रोमांचकारी होता है, इसका अहसास मुझे कुछ…

120 साल पहले ऐसे जाते थे काठगोदाम-नैनीताल से अल्मोड़ा

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सी. डब्लू. मरफी की किताब ‘अ गाइड टू नैनीताल एंड कुमाऊँ’ (1906) से आप अनेक दिलचस्प विवरण पढ़ चुके हैं.…