हैडलाइन्स

केदारनाथ-गौरीकुंड मार्ग पर 7 सड़क निर्माण मजदूर जिन्दा दफ़न

केदारनाथ-गौरीकुंड नेशनल हाईवे पर बांसबाड़ा से करीब 500 मीटर की दूरी पर शुक्रवार दोपहर हुए दर्दनाक हादसे में सात मजदूर जिन्दा दफ्न हो गया. ऑल वेदर रोड के निर्माण के दौरान केदारनाथ-गौरीकुंड हाईवे पर पहाड़ के ऊपर से अचानक भारी मलबा आ जाने से कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए. मलबे की चपेट में आने से सात मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई और तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. एक मजदूर लापता बताया जा रहा है. सभी मजदूर बारामूला जम्मू-कश्मीर के रहने वाले बताए जा रहे हैं. कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को निकालकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है.

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल और एसपी रुद्रप्रयाग अजय सिंह मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटे हैं. घटना के बाद केदारनाथ-गौरकुंड हाईवे बंद है. मलबे में एक जेसीबी और ट्रैक्टर भी दब गए हैं.

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश ने बताया कि कॉन्ट्रैक्टर पर काम कर रहे 23 मजदूरों में से 12 को बचा लिया गया है. इस पूरे मामले में मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी.

निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की लापरवाही के कारण हादसा हुआ बताया जा रहा है. गाजियाबाद की आरजीबी कंस्ट्रक्शन कंपनी यह कार्य करा रही है. सुपरवाइजर तक मौके पर नहीं थे. कितने मजदूर कार्य कर रहे है, इसकी जानकारी के लिए रजिस्ट्रर तक नहीं बनाया गया था. निर्माण ऐजेंसी व ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है. डीएम मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा रहा है. घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

मलबा आने से गौरीकुंड हाईवे पर आवाजाही ठप्प हो गई है. आवागमन ठप्प पड़ने से ऊखीमठ और गुप्तकाशी का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 weeks ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago