अब जबकि पिथौरागढ़ जिले में छात्रों को किताबों और शिक्षकों के लिये आन्दोलन करते महिना भर होने को आया है तब उत्तराखंड सरकार के शिक्षा मंत्री को इस बात पर शंका है कि यह आन्दोलन कालेज छात्रों द्वारा किया भी जा रहा है या नहीं. (pithoragrah student fighting for books)
हमारे देश के मंत्री शिक्षा के प्रति कितने असंवेदनशील हो सकते हैं इसका ताजा उदाहरण हैं उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का बयान. अमर उजाला की एक खबर के अनुसार पिथौरागढ़ में हो रहे छात्रों के आन्दोलन संबंधी एक सवाल पर मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि
पिथौरागढ़ एक ऐसा कालेज है जहां 102 प्रोफ़ेसर हैं. भारत के किसी डिग्री कालेज मे 50-55 से ज्यादा प्रोफ़ेसर नहीं हैं. इस कालेज में 5900 विद्यार्थियों के लिये एक लाख बारह हजार किताबें हैं. कहीं न कहीं यह देखना पड़ेगा की यह आन्दोलन किताबों के लिये है या राजनीति के लिये. इस आंदोलन में कुछ बाहरी लोग भी शामिल हैं.
पिथौरागढ़ जिले में छात्र आंदोलन को देश भर से समर्थन मिलने के बाद कल जिलाधिकारी ने कालेज परिसर में आकर छात्रों से बातचीत की. बातचीत के बाद जिलाधिकारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पिथौरागढ़ में कुछ 66 स्थायी प्रोफेसर हैं. अस्थाई शिक्षक मिलाकर यह संख्या 99 पहुंचती है. इस कालेज में कुल 120 शिक्षकों की नियुक्ति होनी है.
छात्रों ने अपनी मांगों का स्थायी सामाधान न किये जाने तक आन्दोलन जारी रखने की बात कही है. इस बीच नगर के बहुत से सम्मानित नागरिकों ने धरना स्थल पर आकर छात्रों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया.
लगातार ख़राब मौसम के बावजूद छात्र अपनी मांग पर अभी भी टिके हैं. इन छात्रों ने जिला प्रशासन से बातचीत के दौरान कहा कि कॉलेज में किताबों के लिये वार्षिक बजट बनाया जाय, स्थायी सब-रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जाय और शिक्षकों के खाली पदों को पर तुरंत नियुक्ति की जाय. (pithoragrah student fighting for books)
-काफल ट्री डेस्क
शिक्षक और पुस्तक के लिये आन्दोलन कर रहे हैं छात्र और शिक्षा मंत्री अपनी कविता सुना रहे हैं
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पिछली कड़ी : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट…
पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले…
तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक…
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में जब कोई आगंतुक किसी…
नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश…
उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल…