Featured

अल्मोड़ा नंदा देवी मेले में सांस्कृतिक परिधानों में बच्चे : फोटो निबंध

उत्तराखंड का अल्मोड़ा कई वर्षों से नंदा देवी का मेला हर्षोल्लास से मनाता आ रहा है. इस मेले मे आप अल्मोड़ा और कुमाऊँ के विभिन्न रंगों को देख सकते हैं और उनमें डूब सकते हैं.
(Nanda Devi Mela 2023)

उत्तराखंड के ये मेले लोक को अभिव्यक्त करते हैं उनकी आस्था के प्रतीक हैं. इस वर्ष अल्मोड़ा के नंदा देवी मेले में अल्मोड़ा के स्कूलों के बच्चों ने हर वर्ष की तरह पूरे जोश के साथ भाग लिया.

सभी बच्चे सुंदर-सुंदर परिधानों में अपनी खुबसूरत उपस्थिति के साथ ऐतिहासिक ड्योढ़ी पोखर में इकट्ठा हुए और फिर वहां से सांस्कृतिक झांकियों के साथ नंदा देवी मंदिर तक नाचते गाते गए. कुमाऊं के सुन्दर सांस्कृतिक परिधानों में सजे बच्चे देवदूत से लग रहे थे.
(Nanda Devi Mela 2023)

देखिए अल्मोड़ा के इस साल 2023 के नंदा देवी मेले में कल अल्मोड़ा के बच्चों द्वारा निकाली सांस्कृतिक यात्रा के फोटोग्राफ्स. सभी तस्वीरें काफल ट्री अनन्य साथी जयमित्र सिंह बिष्ट ने ली हैं –

फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट
फोटो – जयमित्र सिंह बिष्ट

जयमित्र सिंह बिष्ट

अल्मोड़ा के जयमित्र बेहतरीन फोटोग्राफर होने के साथ साथ तमाम तरह की एडवेंचर गतिविधियों में मुब्तिला रहते हैं. उनका प्रतिष्ठान अल्मोड़ा किताबघर शहर के बुद्धिजीवियों का प्रिय अड्डा है. काफल ट्री के अन्तरंग सहयोगी.

इसे भी पढ़ें: पिथौरागढ़ की हिलजात्रा – फोटो निबंध

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?

हाल ही में मेरी उत्तराखंड यात्रा, हरिद्वार, मसूरी, देहरादून और टिहरी, ने मुझे यह गहरा एहसास कराया कि…

2 weeks ago

कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा

रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के…

3 weeks ago

चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार

चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये…

3 weeks ago

मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब

2013 सन् में नेशनल बुक ट्रस्ट ने देवेन्द्र मेवाड़ी की किताब 'मेरी यादों का पहाड़' छापकर सराहनीय…

3 weeks ago

पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे

नौ साल बाद पिथौरागढ़ जा रहा था. पिछले कुछ वर्षों में जब भी छुट्टी मिली, बेटी…

4 weeks ago

‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है

देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत…

4 weeks ago